J&K को राज्य का दर्जा बहाल करने पर SC ने केंद्र से 8 हफ्तों में मांगा जवाब, CJI बोले- ‘पहलगाम अटैक को कैसे भूल सकते हैं’

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J&K : जम्मू-कश्मीर को दोबारा पूर्ण राज्य का दर्जा देने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से आठ हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने टिप्पणी की कि इस मुद्दे पर फैसला लेने से पहले जमीनी हालात पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है और पहलगाम जैसे आतंकी हमलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि केंद्र सरकार को दो महीने में राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्देश दिया जाए। उनका कहना है कि 2024 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो चुके हैं, जिससे सुरक्षा में कोई बड़ी बाधा नहीं है। उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा बनाए रखना संघवाद और क्षेत्र के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया।

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केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन क्षेत्र की जटिल सुरक्षा और प्रशासनिक चुनौतियों को देखते हुए समय-सीमा बताना अभी संभव नहीं है। उन्होंने अनुरोध किया कि केंद्र को पर्याप्त समय दिया जाए, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए आठ हफ्तों की मोहलत दी।

5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया था। दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को सही ठहराते हुए केंद्र से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने को कहा था।

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राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में संशोधन करना होगा, जिसे संसद के दोनों सदनों से पारित कर राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी होगी। मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी होते ही राज्य का दर्जा लागू हो जाएगा।

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सितंबर 2024 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहला विधानसभा चुनाव हुआ, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस 42 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि भाजपा को 29 सीटें और कांग्रेस को 6 सीटें मिलीं। सीपीआई(एम) ने एक और पीडीपी ने 3 सीटें जीतीं।

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