Sunday, September 27, 2026
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RBI Monetary Policy: क्या कम होगी आपकी EMI या घटेगी महंगाई! RBI की अहम बैठक आज होगा फैसला

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नई दिल्ली : भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) वित्तीय वर्ष की अपनी अंतिम बैठक में 6 फरवरी को रेपो रेट पर अहम फैसला लेने जा रही है। पिछले एक वर्ष में लगातार ब्याज दरों में कटौती के बाद अब बाजार और अर्थशास्त्री इस बात पर बहस कर रहे हैं कि केंद्रीय बैंक एक और कटौती करेगा या मौजूदा हालात को देखते हुए दरों को स्थिर रखेगा।

बजट, उधारी और वैश्विक संकेतों का असर

यह समीक्षा ऐसे समय हो रही है जब केंद्रीय बजट 2026 में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को 12% बढ़ाने और राजकोषीय घाटा 4.3% रखने का लक्ष्य तय किया गया है। वहीं अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ घटाकर 18% करने और भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते से व्यापार व निवेश प्रवाह बढ़ने की उम्मीद भी आर्थिक माहौल को सकारात्मक बना रही है।

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पिछले एक साल में चार बार घट चुकी हैं दरें

MPC फरवरी, अप्रैल, जून और दिसंबर 2025 में कुल मिलाकर 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुकी है। इतनी बड़ी ढील के बाद कई विशेषज्ञ मानते हैं कि आगे और कटौती की गुंजाइश सीमित हो गई है, खासकर तब जब महंगाई में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के संकेत दिख रहे हैं।

फोकस लिक्विडिटी और बॉन्ड यील्ड पर

विश्लेषकों के अनुसार इस बार चर्चा दरों से ज्यादा लिक्विडिटी प्रबंधन, बॉन्ड यील्ड और वित्तीय स्थिरता पर केंद्रित रह सकती है। अनुमान है कि मार्च अंत तक बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त तरलता बनी रहेगी, जिससे अतिरिक्त मौद्रिक ढील की जरूरत कम हो सकती है।

क्या स्थिर रहेगा रेपो रेट?

कई वैश्विक वित्तीय संस्थानों का मानना है कि RBI इस बार रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रख सकता है और न्यूट्रल नीति रुख बनाए रखेगा। साथ ही OMO, VRR और फॉरेक्स ऑपरेशंस जैसे उपकरणों के जरिए बाजार स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया जा सकता है।

कुल संकेत क्या कहते हैं

बजट उधारी, बेहतर होता वैश्विक व्यापार माहौल, महंगाई के संभावित दबाव और पहले से मौजूद ऊंची लिक्विडिटी को देखते हुए 6 फरवरी की बैठक में रेपो रेट में नई कटौती की संभावना कम नजर आती है। हालांकि अंतिम फैसला MPC की सामूहिक राय पर निर्भर करेगा।

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