Raipur Land Scam : पहले सरकारी जमीन को किसानों के नाम किया, फिर मल्टीनेशनल कंपनी को बेचा, 150 करोड़ के घोटाले पर RERA का बैन….

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Raipur Land Scam
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Raipur Land Scam : रायपुर। राजधानी रायपुर में राज्य गठन के बाद के सबसे बड़े जमीन घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत 150 करोड़ रुपए बताई जा रही है। रसूखदारों ने अधिकारियों से मिलीभगत कर सरकारी नियमों को ताक पर रखते हुए यह सुनियोजित घोटाला किया है।

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Raipur Land Scam : कैसे हुआ 50 एकड़ जमीन का घोटाला?

यह पूरा मामला शहर से लगी डोमा (प.ह.नं. 84) इलाके की करीब 50 एकड़ जमीन से जुड़ा है। दस्तावेजों के अनुसार, यह जमीन आजादी के बाद से ही तहसील रिकॉर्ड में ‘घास और चरई जमीन’ के तौर पर दर्ज थी, जिसका अर्थ है कि इसे निजी उपयोग के लिए किसी को भी आवंटित नहीं किया जा सकता था।

  1. सरकारी जमीन का अवैध आवंटन: नियमों का उल्लंघन करते हुए इस सरकारी जमीन को सबसे पहले मनोज यादव समेत कुछ किसानों के नाम पर आवंटित कर दिया गया।
  2. रसूखदारों ने खरीदी: आवंटन के तुरंत बाद, शहर के दो नामी रसूखदारों की कंपनियों— स्वास्तिक प्रोजेक्ट्स और रूपी रिसोर्सेस प्राइवेट लिमिटेड— के संचालकों ने इन किसानों से जमीन खरीद ली। अधिकारियों ने बिना किसी जांच के करोड़ों की इस सरकारी जमीन को निजी कंपनियों के नाम कर दिया।
  3. नामी कंपनी को बिक्री: अंत में, इन कंपनियों ने यही जमीन देश की एक नामी मल्टीनेशनल कंपनी (मेसर्स गोदरेज प्राइवेट लिमिटेड) को बेच दी। यह मल्टीनेशनल कंपनी अब इस जमीन पर प्लॉटिंग कर बिक्री की तैयारी में थी और हाल ही में इसके लिए एक बड़ा विज्ञापन भी जारी किया था।

RERA ने बिक्री पर लगाई रोक

रसूखदारों के बुलंद हौसलों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने रेरा (RERA) में प्रोजेक्ट का पंजीयन कराए बगैर ही जमीनों की बिक्री शुरू कर दी थी।

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शिकायत रेरा तक पहुंचने के बाद, जांच में पाया गया कि यह प्रोजेक्ट रेरा में पंजीकृत नहीं है, जो नियमों का गंभीर उल्लंघन है। इस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए रेरा ने जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक लगा दी है। रेरा ने इस मामले में विज्ञापन और बिक्री में शामिल तीन एजेंटों— शशिकांत झा (पुणे), दीक्षा राजौर (मुंबई) और प्रॉपर्टी क्लाउड्स रियल्टी स्पेसिफायर प्राइवेट लिमिटेड (मुंबई)— पर भी कार्रवाई करते हुए उन्हें नोटिस जारी किया है।

यह घोटाला सरकारी जमीन पर रसूखदारों के दखल और अधिकारियों की मिलीभगत का एक बड़ा उदाहरण है, जिस पर अब कानूनी शिकंजा कसा गया है।

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