Raipur Child Labour Rescue : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राजधानी रायपुर के सड्डू और खरोरा स्थित दो फैक्ट्रियों में छापेमारी की। इस कार्रवाई में कुल 109 लड़के और लड़कियाँ काम करते हुए पाए गए, जिनकी उम्र 18 साल से कम होने का संदेह है। इनमें 68 लड़कियाँ और 41 लड़के शामिल हैं, जो मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के रहने वाले हैं।
Raipur Child Labour Rescue : फैक्ट्रियों पर कार्रवाई
सड्डू की बिस्कुट फैक्ट्री
खरोरा की मशरूम फैक्ट्री
छापेमारी के बाद, NHRC ने दोनों फैक्ट्रियों को तत्काल बंद करने का निर्देश दिया है और जांच पूरी होने तक ये बंद रहेंगी।
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रेस्क्यू और आगे की कार्रवाई
रेस्क्यू किए गए मजदूर: सभी 109 नाबालिग मजदूरों को रेस्क्यू कर लिया गया है।
सुरक्षित स्थान: महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने उन्हें अलग-अलग इलाकों के सेंटर (माना) में रखा है।
जांच: फिलहाल मजदूरों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
दस्तावेज: नाबालिगों के परिजनों को बुलाया गया है और उनसे दस्तावेज मांगे गए हैं।
भागीदारी: इस कार्रवाई में जिला प्रशासन, पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग और श्रम विभाग की टीम भी साथ थी। दिल्ली से बचपन बचाओ संस्था के सदस्य भी जांच के लिए पहुंचे हैं।
पुरानी शिकायत और स्वत: संज्ञान
जुलाई का छापा: खरोरा की मोजो फैक्ट्री (मशरूम फैक्ट्री) पर जुलाई में भी छापा पड़ा था, जहां 97 मजदूरों को रेस्क्यू किया गया था।
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पिछली शिकायत: तब नाबालिगों से जबरन मजदूरी करवाने, वेतन नहीं देने और मारपीट की शिकायतें सामने आई थीं।
एफआईआर नहीं: जुलाई में मामला सामने आने के बावजूद श्रम विभाग और पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की थी।
NHRC का संज्ञान: मीडिया में प्रकाशित खबरों को NHRC ने स्वत: संज्ञान लिया और प्रारंभिक जांच शुरू की, जिसके आधार पर सोमवार को यह बड़ा छापा मारा गया। यह मोजो फैक्ट्री एक बड़े नेता से जुड़ी बताई जाती है।
बाल श्रम पर कानून और सजा
छत्तीसगढ़ में बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 लागू है:
14 वर्ष से कम : बच्चों से कोई भी काम करवाना पूर्णतः प्रतिबंधित है।
14 से 18 वर्ष (किशोर): खतरनाक व्यवसायों (जैसे खनन, विस्फोटक, हानिकारक रसायन वाली फैक्ट्री, ईंट भट्ठा आदि) में काम करने की अनुमति नहीं है।
सुरक्षित जगहों पर काम : सुरक्षित और गैर-खतरनाक जगहों पर काम करने की अनुमति है, लेकिन काम का समय सीमित है और रात की शिफ्ट या शोषण नहीं हो सकता।
सजा: बाल श्रम एक संज्ञेय अपराध है। इसका उल्लंघन करने पर नियोक्ता को दो साल तक की कैद या ₹50,000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यह खबर बाल श्रम के खिलाफ चल रही जांच और कानूनी कार्रवाई पर आधारित है।











