CG Bastar Visit: जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व में आज एक खास अवसर देखने को मिलेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बस्तर दौरे पर रहेंगी और ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शामिल होंगी। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी मौजूद रहेंगे। राष्ट्रपति की मौजूदगी से बस्तर की समृद्ध जनजातीय परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिलने की उम्मीद है।
मां दंतेश्वरी मंदिर में करेंगी पूजा-अर्चना
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुबह 11:15 बजे जगदलपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगी। यहां राज्य सरकार और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद राष्ट्रपति मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी और देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।बस्तर दशहरा की परंपरा में मां दंतेश्वरी की विशेष भूमिका है। ऐसे में राष्ट्रपति का मंदिर दर्शन इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
मुरिया दरबार में शामिल होंगी राष्ट्रपति
मंदिर दर्शन के बाद राष्ट्रपति जगदलपुर के सिरहासार भवन में आयोजित ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शामिल होंगी। यह दरबार बस्तर दशहरा की प्रमुख परंपराओं में से एक है। इसमें बस्तर संभाग के मांझी, मुखिया और जनजातीय प्रतिनिधि एकत्र होकर अपनी समस्याओं, परंपराओं और क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को सामने रखते हैं।पिछले वर्ष मुरिया दरबार में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए थे। इस बार राष्ट्रपति की उपस्थिति के कारण आयोजन को विशेष महत्व मिल रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी रहेंगे मौजूद
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी इस अवसर पर बस्तर दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, वे सुबह रायपुर से जगदलपुर के लिए रवाना होंगे। उनके कार्यक्रम में मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना, मुरिया दरबार और लालबाग मैदान में बस्तर दशहरा कार्यक्रम में शामिल होना निर्धारित है।राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की मौजूदगी में होने वाला यह आयोजन बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और जनजातीय परंपराओं को सामने लाने का अवसर होगा।
क्या है मुरिया दरबार की खासियत?
मुरिया दरबार बस्तर दशहरा से जुड़ी एक ऐतिहासिक परंपरा है। इसमें जनजातीय समाज के प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र होते हैं और स्थानीय मुद्दों, सामाजिक परंपराओं तथा समुदाय की समस्याओं पर अपनी बात रखते हैं। यह आयोजन बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक व्यवस्था का प्रतीक माना जाता है।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की इस कार्यक्रम में भागीदारी से बस्तर दशहरा की परंपरा को देशभर में और अधिक पहचान मिलने की संभावना है।