Thursday, August 20, 2026
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RSS पर बैन की मांग से मचा हड़कंप! मोहन भागवत के अमेरिका दौरे से पहले USCIRF का बड़ा बयान

USCIRF RSS Ban Demand: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी USCIRF की एक नई मांग ने भारत-अमेरिका संबंधों और RSS को लेकर बहस तेज कर दी है। आयोग ने अमेरिकी सरकार से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं देने और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकों से बचने की अपील की है। USCIRF की RSS पर मांग ऐसे समय सामने आई है, जब RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन दौरे की तैयारी चल रही है।

USCIRF के चेयरमैन आसिफ महमूद ने बुधवार को RSS को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं और आयोग के अनुसार, संगठन से जुड़े कुछ सहयोगी समूहों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों में शामिल होने के आरोप हैं। USCIRF की RSS पर मांग को भागवत के आगामी विदेशी दौरे के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाने वाले हैं। कार्यक्रम के अनुसार, वह 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) के ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ कार्यक्रम में शामिल होंगे।

अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं पर कार्रवाई की अपील
USCIRF कमिश्नर जीन मिल्स ने भी RSS सदस्यों को लेकर अमेरिकी सरकार से कड़े कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जाना चाहिए। USCIRF की RSS पर मांग में राजनयिक सम्मान और उच्चस्तरीय बैठकों से जुड़े कदमों का भी उल्लेख किया गया है।हालांकि, यह समझना जरूरी है कि USCIRF एक स्वतंत्र अमेरिकी सरकारी आयोग है और उसकी सिफारिश अपने आप किसी व्यक्ति या संगठन पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू नहीं करती। अंतिम फैसला अमेरिकी सरकार के संबंधित संस्थानों के अधिकार क्षेत्र में होता है।

कनाडा में भागवत के दौरे के समर्थन में 100 से ज्यादा संगठन
दूसरी ओर, कनाडा में 100 से अधिक संगठनों ने मोहन भागवत के प्रस्तावित दौरे का समर्थन किया है। इन संगठनों ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और मंत्रियों को पत्र लिखकर भागवत को रोकने की मांगों को खारिज करने की अपील की है। USCIRF की RSS पर मांग के बीच इन संगठनों ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई से पहले स्वतंत्र और विश्वसनीय सबूतों के साथ कानून और उचित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब भागवत के विदेश दौरे को लेकर अलग-अलग समूहों की ओर से समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
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भारत को CPC सूची में डालने की सिफारिश पहले भी कर चुका है USCIRF
USCIRF लंबे समय से भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अपनी रिपोर्ट जारी करता रहा है। आयोग ने भारत को ‘विशेष चिंता का देश’ यानी Country of Particular Concern (CPC) घोषित करने की सिफारिश कई बार की है। USCIRF की RSS पर मांग इसी लंबे विवाद की नई कड़ी मानी जा रही है।आयोग ने पहली बार 2004 में ऐसी सिफारिश की थी। इसके बाद 2020 में इसे दोहराया गया और 2021 से 2026 तक की अपनी रिपोर्टों में भी USCIRF ने भारत को CPC सूची में शामिल करने की मांग की। हालांकि, USCIRF की सिफारिश का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने भारत को वास्तव में CPC घोषित कर दिया है।

मार्च 2026 की रिपोर्ट में RSS और RAW का भी जिक्र
मार्च 2026 में जारी USCIRF की वार्षिक रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों को लेकर चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट में RSS और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी RAW जैसी संस्थाओं और कुछ लोगों पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया गया था। USCIRF की RSS पर मांग को लेकर भारत ने पहले भी आयोग की रिपोर्टों को खारिज किया है।भारत सरकार ने USCIRF की रिपोर्टों की आलोचना करते हुए कहा था कि आयोग संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक सोच के आधार पर भारत की छवि खराब करने की कोशिश करता है। 16 मार्च को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने USCIRF की आलोचना करते हुए कहा था कि भारत की चुनिंदा आलोचना करने के बजाय आयोग को अमेरिका में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की घटनाओं पर भी ध्यान देना चाहिए।

USCIRF क्या है और इसके पास कितनी ताकत है?
USCIRF यानी United States Commission on International Religious Freedom अमेरिका की एक स्वतंत्र सरकारी संस्था है। इसकी स्थापना अमेरिकी कांग्रेस ने 1998 के International Religious Freedom Act के तहत की थी। आयोग के सदस्यों की नियुक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति और कांग्रेस के दोनों प्रमुख दलों की ओर से होती है।USCIRF की RSS पर मांग को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आयोग का मुख्य काम दुनिया के अलग-अलग देशों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर नजर रखना और अमेरिकी सरकार को नीतिगत सलाह देना है। यह सालाना रिपोर्ट जारी करता है और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अपनी सिफारिशें राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और कांग्रेस के सामने रखता है।

क्या USCIRF खुद प्रतिबंध लगा सकता है?
नहीं। USCIRF किसी देश, संगठन या व्यक्ति पर अपने स्तर से अमेरिकी प्रतिबंध लागू नहीं कर सकता। वह अमेरिकी सरकार से प्रतिबंध, राजनयिक दबाव या अन्य कदम उठाने की सिफारिश कर सकता है। USCIRF की RSS पर मांग के मामले में भी अंतिम फैसला अमेरिकी सरकार के पास होगा।आयोग किसी देश को CPC घोषित करने की सिफारिश कर सकता है। इसके अलावा वह गैर-सरकारी संगठनों या समूहों को लेकर भी विशेष चिंता वाली संस्था या समूह के रूप में कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है। इसलिए मौजूदा विवाद में USCIRF की मांग एक सिफारिश है, तत्काल लागू होने वाला प्रतिबंध नहीं।

अब नजर भागवत के विदेशी दौरे पर
USCIRF की टिप्पणी के बाद मोहन भागवत का आगामी अमेरिका दौरा चर्चा में आ गया है। 25 अगस्त से शुरू होने वाले दौरे में अमेरिका के साथ कनाडा और ब्रिटेन भी शामिल हैं। 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में उनका AHEAD के कार्यक्रम में शामिल होना प्रस्तावित है। USCIRF की RSS पर मांग के बाद अब इस दौरे को लेकर आगे क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर नजर रहेगी।

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