Tire scam : गौरी शंकर गुप्ता/जशपुर/पत्थलगांव: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की पत्थलगांव जनपद पंचायत इन दिनों विकास कार्यों के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के ‘अजूबे’ कारनामों के लिए सुर्खियों में है। यहाँ सरकारी खजाने की लूट का ऐसा ‘वाटरप्रूफ’ मॉडल तैयार किया गया है, जहाँ नियमों की कोई भी बौछार बेअसर साबित हो रही है। ताजा खुलासे के अनुसार, तत्कालीन साहबों और बाबुओं की जुगलबंदी ने जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा अपनी निजी विलासिता और फर्जी बिलों के भुगतान में ठिकाने लगा दिया है।

Tire scam : भ्रष्टाचार की बानगी देखिए कि साहबों की निजी गाड़ियों के टायर तक सरकारी खजाने से बदले जा रहे हैं। ‘राज टायर्स’ के एक बिल (दिनांक 24/05/2023) के अनुसार, वाहन संख्या CG 30 D 9997 के लिए 43,800 रुपये के ‘अपोलो टायर’ जनपद निधि से खरीदे गए। ताज्जुब की बात यह है कि गाड़ी निजी है, लेकिन उसका रखरखाव सरकारी खर्च पर हो रहा है। इसके अलावा डीजल के नाम पर भी ‘जादुई खेल’ खेला गया है। जून 2023 के बिलों में ‘यादव फ्यूल्स’ को 80,365 रुपये का भुगतान एक झटके में कर दिया गया। बिलों के क्रम और तारीखें गवाही दे रही हैं कि गाड़ियाँ सड़क पर कम और बिल बुक में ज्यादा दौड़ रही थीं।
Tire scam : सिस्टम की विफलता का आलम यह है कि बिना किसी ट्रेवल एजेंसी के, व्यक्तिगत तौर पर प्रतिमाह 46,500 रुपये का वाहन किराया रेवड़ियों की तरह बांटा गया। भंडार क्रय नियमों को रद्दी की टोकरी में डालकर 5 लाख से अधिक की स्टेशनरी और अन्य सामग्री बिना किसी टेंडर या कोटेशन के खरीदी गई। सूत्रों की मानें तो अपने चहेते सप्लायरों को सीधा लाभ पहुँचाना और मोटा कमीशन डकारना यहाँ का ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) बन चुका है।
Tire scam : इस पूरे खेल में ‘सोमारू बाबू’ जैसे किरदारों की भूमिका संदिग्ध है, जो सालों से एक ही कुर्सी पर जमे हुए हैं। अधिकारी बदलते रहे—चाहे वे टी.डी. मरकाम हों, पवन पटेल हों या अन्य—लेकिन सिस्टम का रिमोट कंट्रोल इन्हीं बाबुओं के हाथ में रहा। विडंबना यह है कि यह सब मुख्यमंत्री के अपने गृह जिले में धड़ल्ले से चल रहा है। साहबों ने बिलों पर ‘भुगतान उचित है’ की मुहर लगाकर मानों सरकारी धन की लूट की खुली छूट दे दी हो। अब जनता पूछ रही है कि क्या इन अधिकारियों से टायर और डीजल के पैसों की ‘वसूली’ होगी, या जांच की फाइलें भी किसी बाबू की दराज में दफन हो जाएंगी?













