Kawardha Paddy Scam 2026 : कवर्धा/कबीरधाम: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में सरकारी धान के रख-रखाव में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। जिले के दो बड़े संग्रहण केंद्रों से लगभग 26 हजार क्विंटल धान गायब पाया गया है, जिसकी बाजार कीमत करीब 7 करोड़ रुपये है। जब इस भारी कमी पर जवाब मांगा गया, तो विपणन विभाग के अधिकारियों ने इसका ठीकरा चूहों, दीमकों और मौसम पर फोड़ दिया।
बाजार चारभाठा बना घोटाले का केंद्र
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में खरीदे गए धान का भंडारण बाजार चारभाठा और बघर्रा केंद्रों में किया गया था। कुल 7.99 लाख क्विंटल धान में से मिलान के दौरान 26 हजार क्विंटल कम मिला। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें से 22 हजार क्विंटल की कमी अकेले बाजार चारभाठा केंद्र में पाई गई है।
भ्रष्टाचार की ‘सुनियोजित’ स्क्रिप्ट: सीसीटीवी से छेड़छाड़ और फर्जी बिल
मामले की गहराई में जाने पर पता चलता है कि यह केवल चूहों का काम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हेराफेरी है। केंद्र प्रभारी प्रितेश पांडेय पर गंभीर आरोप लगे हैं:
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डिजिटल सबूत मिटाए: संग्रहण केंद्र के सीसीटीवी कैमरों के साथ बार-बार छेड़छाड़ की गई ताकि संदिग्ध गतिविधियां रिकॉर्ड न हों।
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फर्जीवाड़ा: डैमेज धान के फर्जी बिल बनाए गए और मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।
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साजिश: आरोप है कि उपार्जन केंद्र के जिम्मेदारों के साथ मिलकर धान की कागजी आवक-जावक (Entry) में हेरफेर की गई।
अफसरों का बचाव: “बाकी जिलों से हम बेहतर हैं”
इस घोटाले पर जिला विपणन अधिकारी (DMO) अभिषेक मिश्रा का बयान हास्यास्पद और बचावकारी नजर आता है। उन्होंने कहा कि “मौसम, चूहों और कीड़ों के कारण धान कम हुआ है।” उन्होंने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय तुलनात्मक तर्क देते हुए कहा कि प्रदेश के अन्य 65 केंद्रों की तुलना में कवर्धा की स्थिति फिर भी बेहतर है। हालांकि, दबाव बढ़ता देख प्रभारी प्रितेश पांडेय को हटा दिया गया है।
जांच टीम गठित: प्रारंभिक रिपोर्ट में आरोप सही
सहायक जिला खाद्य अधिकारी ने पुष्टि की है कि शिकायतें बेहद गंभीर हैं और प्रारंभिक जांच में भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं। जांच टीम का गठन कर दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद कड़ी कानूनी कार्रवाई की बात कही जा रही है।











