निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : भारत ने मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देकर सीमा पार आतंकवाद पर करारा प्रहार किया था। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान के भीतर सक्रिय आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें कई आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि हुई। यह कार्रवाई केवल सैन्य सफलता तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर पाकिस्तान की रणनीतिक सोच और सैन्य संरचना पर भी साफ नजर आया।
सीडीएस का बड़ा खुलासा
देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को अपनी सैन्य रणनीति में बड़े और असाधारण बदलाव करने पड़े। उनके मुताबिक, इस ऑपरेशन ने इस्लामाबाद की कमजोरियों को उजागर कर दिया और उसे अपने कमांड सिस्टम को पुनर्गठित करने के लिए मजबूर किया।
पाकिस्तान ने बदला सैन्य कमांड ढांचा
जनरल चौहान ने बताया कि पाकिस्तान ने जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी को समाप्त कर नया चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज पद बनाया है। इसके अलावा, नेशनल स्ट्रेटेजी कमांड और आर्मी रॉकेट फोर्सेज कमांड जैसी नई संस्थाएं भी गठित की गई हैं। इससे थल, संयुक्त और रणनीतिक सैन्य शक्तियों का केंद्रीकरण एक ही नेतृत्व के तहत हो गया है, जो संघर्ष के दौरान सामने आई उसकी कमियों को दर्शाता है।
भारत ने सीखे अहम सबक
पुणे में आयोजित पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल 2026 के दौरान जनरल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के साथ-साथ उरी सर्जिकल स्ट्राइक, डोकलाम, गलवान और बालाकोट एयर स्ट्राइक से भारत ने महत्वपूर्ण रणनीतिक सबक लिए हैं। अब भारत एक ऐसे मानकीकृत सैन्य सिस्टम पर काम कर रहा है, जिसे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत लागू किया जा सके।
भविष्य का युद्ध: तकनीक बनाम भूगोल
सीडीएस ने यह भी स्पष्ट किया कि वैश्विक स्तर पर युद्ध की प्रकृति बदल रही है। जहां पहले भूगोल युद्ध का आधार होता था, वहीं अब तकनीक निर्णायक भूमिका निभा रही है। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य में नॉन-कॉन्टैक्ट और नॉन-काइनेटिक युद्ध बढ़ेंगे, लेकिन पारंपरिक जमीनी युद्ध अब भी बेहद क्रूर और मैनपावर आधारित रहेंगे।











