NTPC Rakhad : NTPC ठेका कंपनी की मनमानी से ग्रामीण त्रस्त, खुले में लोडिंग और ओवरलोडिंग ने बढ़ाई समस्या

VIKASH KHALKHO

NTPC Rakhad : सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के विंध्यनगर क्षेत्र में स्थित एनटीपीसी परियोजना के शाहपुर और बलियरी राखड़ डैम से फ्लाई ऐश (राख) की ढुलाई स्थानीय ग्रामीणों के लिए एक बड़ा पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट बन गई है। ग्रामीणों ने ऐश टेक इंडिया नामक ठेका कंपनी पर नियमों के घोर उल्लंघन और मनमानी का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि राखड़ परिवहन के दौरान न तो सड़कों पर पर्याप्त पानी का छिड़काव किया जाता है और न ही ओवरलोड वाहनों को नियंत्रित किया जा रहा है, जिससे हवा में उड़ती राख और धूल ने पूरे क्षेत्र को गंभीर प्रदूषण की चपेट में ले लिया है।

NTPC Rakhad : प्रदूषण नियंत्रण के नियम ताक पर: ऐश टेक की लापरवाही

स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात-दिन सैकड़ों ओवरलोड वाहन राखड़ डैम से रेलवे यार्ड के बीच आवागमन करते हैं, जिसके चलते सड़कें हमेशा धूल और राख से पटी रहती हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि एनटीपीसी ने रेलवे राखड़ यार्ड के संचालन का काम ऐश टेक इंडिया को सौंपा है, लेकिन कंपनी पर्यावरण नियमों का बिल्कुल भी पालन नहीं कर रही है। राख यार्ड में भी ऐश को खुले में ढेर कर छोड़ दिया जाता है, जिससे हल्की हवा भी राख को उड़ाकर आसपास के घरों और कृषि योग्य खेतों तक पहुंचा देती है। ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं कि जल छिड़काव (डस्ट सप्रेशन) केवल दिखावा मात्र है।

NTPC Rakhad : स्वास्थ्य और कृषि पर सीधा हमला

राखड़ यार्ड के आसपास रहने वाले ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। निवासियों के अनुसार, सुबह उठते ही घर की फर्श, बर्तन, कपड़े और पीने के पानी पर भी राख की मोटी परतें जमा मिलती हैं। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रहवासियों ने आँखों में जलन, नाक में राख जाने से सांस लेने में तकलीफ, रोजाना खांसी और एलर्जी की शिकायतें की हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई लोग अस्थमा और सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियों के शिकार हो चुके हैं। इसके अलावा, खेतों में राख गिरने से कृषि उत्पादन पर विपरीत असर पड़ रहा है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है।

NTPC Rakhad : प्रशासन और प्रबंधन पर मिलीभगत का आरोप

प्रदूषण से त्रस्त ग्रामीणों ने प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन से स्पष्ट मांग रखी है कि रेलवे राखड़ यार्ड को तुरंत बंद किया जाए, या आबादी प्रभावित न हो इसके लिए राख परिवहन की कोई वैकल्पिक, सुरक्षित व्यवस्था बनाई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे सामूहिक आंदोलन और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। इस पूरे मामले ने एनटीपीसी प्रबंधन की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि राख का खुले में परिवहन पर्यावरण नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। ओवरलोडिंग से सड़क सुरक्षा भी खतरे में है।

NTPC Rakhad : अधिकारियों का टालमटोल रवैया

इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन एसडीएम सुरेश जाधव का फोन रिसीव नहीं हुआ। वहीं, एनटीपीसी के जनसंपर्क अधिकारी शंकर सुब्रमण्यम से बात करने पर उन्होंने गोलमोल जवाब दिया और यार्ड में फैली अव्यवस्था का वीडियो भेजने के बाद भी कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया, सिर्फ इतना कहा कि “हम जानकारी लेके बाद में बताते हैं।” ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में एनटीपीसी के अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत हो सकती है, जिसके कारण नियम-कानूनों की लगातार अनदेखी की जा रही है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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