Tuesday, August 18, 2026
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Bastar Goncha Parv: जगदलपुर में ऐतिहासिक गोंचा पर्व की तैयारियां शुरू, 9 दिनों तक होंगे अनवरत धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान

Bastar Goncha Parv: जगदलपुर/बस्तर: छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल बस्तर की अनूठी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान समेटे ऐतिहासिक ‘गोंचा पर्व’ की तैयारियां जगदलपुर में बेहद तेज हो गई हैं। बस्तर की इस गौरवशाली परंपरा को इस वर्ष भी पूरी भव्यता और श्रद्धा के साथ मनाने के लिए मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने कमर कस ली है। इस पर्व के दौरान पूरे 9 दिनों तक जगदलपुर शहर आस्था के रंग में सराबोर रहेगा, जहाँ अनवरत सांस्कृतिक कार्यक्रम, भव्य महाभंडारा और विभिन्न पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाएंगे।

समाज के सहयोग से सजती है महफिल, इस बार भव्यता होगी दोगुनी

गोंचा मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, बस्तर के इस पारंपरिक उत्सव को हर साल स्थानीय समाज, प्रबुद्ध नागरिकों और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के आत्मीय सहयोग से गरिमामय ढंग से संपन्न कराया जाता है। इस उत्सव को और अधिक बेहतर, सुव्यवस्थित और आकर्षक बनाने के लिए पूर्व में संस्कृति विभाग की ओर से ₹5 लाख के बजट का प्रावधान किया जाता था। लेकिन, पर्व की बढ़ती लोकप्रियता और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए, इस बार स्थानीय तहसीलदार के माध्यम से शासन को ₹18 लाख की वित्तीय सहायता का एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा गया है।

व्यवस्थाओं को लेकर कलेक्टर और तहसीलदार के साथ होगी अहम बैठक

बजट और तैयारियों के संबंध में जानकारी साझा करते हुए मंदिर समिति के वरिष्ठ सदस्य नरेंद्र पाणिग्राही ने बताया कि शासन को भेजे गए इस नवीन प्रस्ताव की स्वीकृति को लेकर वे बेहद आशान्वित हैं। उन्होंने कहा कि आयोजन में सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल और लाइटिंग जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने तथा शासन से मिलने वाले वित्तीय सहयोग पर विस्तार से चर्चा करने के लिए जल्द ही तहसीलदार और जगदलपुर कलेक्टर के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो।

बस्तर का गोंचा पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यहाँ की जनजातीय लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत, और भाईचारे का अनूठा प्रतीक है, जो सदियों से अपनी मौलिकता को संजोए हुए है। यही वजह है कि इस 9 दिवसीय महापर्व का गवाह बनने के लिए हर साल लाखों की संख्या में लोग बस्तर पहुँचते हैं। समिति का दावा है कि इस बार का आयोजन बस्तर के इतिहास में और भी अधिक भव्य और यादगार होने जा रहा है।

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