नई दिल्ली [Nishanebaaz News]। आगामी त्योहारी सीजन से पहले देश में चीनी की बढ़ती कीमतों, घटते स्टॉक और इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20 Policy) को लेकर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि त्योहारों से ठीक पहले सरकार की गलत नीतियों के कारण चीनी के दाम करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
खरगे के इन आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने पलटवार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर विस्तृत आंकड़े पेश करते हुए कहा कि चीनी की कमी को E20 नीति से जोड़ना सुविधाजनक राजनीति तो हो सकती है, लेकिन आंकड़े इसकी पुष्टि नहीं करते।
चीनी की कीमत, स्टॉक और आयात को E20 से जोड़ना सुविधाजनक राजनीति है, लेकिन आंकड़े इसकी पुष्टि नहीं करते।
1. “9 साल का सबसे कम स्टॉक क्यों? 10 लाख टन आयात क्यों?”
क्योंकि आयात का फैसला Sugar Balance से होता है, उत्पादन, consumption, stocks और prices से, E20 से नहीं।
2025-26 का… https://t.co/oNXs7kU37w
— Amit Malviya (@amitmalviya) August 22, 2026
मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार से पूछे 3 तीखे सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने चीनी के आयात और इथेनॉल नीति को लेकर मोदी सरकार से तीन मुख्य सवाल किए:
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9 साल के निचले स्तर पर स्टॉक क्यों? दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देश भारत में आज चीनी का स्टॉक 9 साल के सबसे निचले स्तर पर कैसे पहुंच गया?
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निर्यात रोककर आयात की नौबत क्यों? ऐसी क्या स्थिति बनी कि भारत को चीनी का निर्यात रोकना पड़ा और 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात (Duty-Free Import) करने का फैसला लेना पड़ा?
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E20 नीति की समीक्षा क्यों नहीं? बीते 3 महीनों में चीनी 40% महंगी हो चुकी है। जब देश में चीनी की कमी है और बाहर से मंगानी पड़ रही है, तो गन्ने और अनाज को E20 के लिए इथेनॉल में झोंकने की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही?
अमित मालवीय का पलटवार: ‘आंकड़े कुछ और कहते हैं’
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सिलसिलेवार ढंग से आंकड़े पेश करते हुए कांग्रेस के सभी आरोपों को खारिज किया और चीनी की बढ़ती कीमतों की असली वजह बताई:
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उत्पादन में गिरावट असली वजह: अमित मालवीय ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2025-26 के लिए चीनी का शुरुआती उत्पादन अनुमान करीब 349 लाख टन था, जो प्रतिकूल मौसम व अन्य कारणों से घटकर लगभग 280 लाख टन रह गया है। उत्पादन में इस भारी गिरावट, स्थिर खपत और घटते क्लोजिंग स्टॉक के कारण कीमतों पर दबाव बना है।
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E20 से पहले भी होता था आयात: मालवीय ने कहा कि E20 नीति को चीनी की कमी का जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह गलत है। UPA-II सरकार के दौरान (2009-10 से 2013-14 के बीच) 75.25 लाख मीट्रिक टन (LMT) चीनी का आयात किया गया था, जबकि केवल 2009-10 में ही 41.8 LMT आयात हुआ था—तब E20 का कोई अस्तित्व ही नहीं था।
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री-एक्सपोर्ट के लिए भी आता है आयातित माल: उन्होंने यह भी समझाया कि हर इंपोर्ट सिर्फ घरेलू खपत के लिए नहीं होता; आयातित कच्ची चीनी (Raw Sugar) का एक बड़ा हिस्सा रिफाइनिंग और री-एक्सपोर्ट (Re-export) के लिए लाया जाता है।
अमित मालवीय के अनुसार, चीनी आयात का निर्णय ‘शुगर बैलेंस’ (उत्पादन, खपत और स्टॉक के संतुलन) से तय होता है। घरेलू उपलब्धता बनाए रखने और आम जनता पर कीमतों का बोझ न पड़े, इसके लिए आयात एक संतुलित नीतिगत प्रक्रिया है। इसे इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति की नाकामी बताना आंकड़ों के विपरीत है।





