Saturday, August 29, 2026
Home Chhattisgarh CG Vidhan Sabha Monsoon Session 2026: तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह के सवाल...

CG Vidhan Sabha Monsoon Session 2026: तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह के सवाल पर सीएम साय का जवाब: “छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी से मांगे गए हैं दिशा-निर्देश”

CG Vidhan Sabha Monsoon Session 2026: रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र 2026 के दौरान तखतपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित ‘कोपरा जलाशय’ (रामसर साइट) के आसपास संचालित हो रहे कोयला डिपो (Coal Depots) का मामला जोर-शोर से उठा। तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि रामसर साइट के 10 किलोमीटर के दायरे में कोल डिपो के संचालन को लेकर छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी से मार्गदर्शन मांगा गया है और निर्देशों की प्रतीक्षा की जा रही है।

विधायक धर्मजीत सिंह ने पूछे कड़े सवाल

विधानसभा में विधायक धर्मजीत सिंह ने तखतपुर क्षेत्र के अंतर्गत स्वीकृत कोयला भंडारण अनुज्ञप्तियों (कोल स्टोरेज लाइसेंस), उनकी अवधि, वर्तमान संचालन स्थिति और पर्यावरण विभाग द्वारा की गई जांच का ब्योरा मांगा। उन्होंने पूछा कि क्या कोपरा जलाशय के रामसर साइट घोषित होने के बाद उसके 10 किमी के दायरे में कोल डिपो संचालित करने का प्रावधान है और यदि नहीं, तो इन पर कब तक कार्रवाई की जाएगी?

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का लिखित जवाब

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लिखित जवाब में बताया कि तखतपुर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत ग्राम कोपरा स्थित जलाशय को 12 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी द्वारा रामसर साइट के रूप में चिन्हांकित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया:

“रामसर साइट के 10 किमी के दायरे में कोल डिपो संचालन के संबंध में वर्तमान में छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी द्वारा दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। निर्देश प्राप्त होते ही तदनुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।”

क्यों संवेदनशील है 10 किमी का दायरा?

पर्यावरण नियमों के अनुसार:

  • इको-सेंसिटिव ज़ोन (1 किमी): सुप्रीम कोर्ट और आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत रामसर साइटों के आसपास 1 किमी का अनिवार्य इको-सेंसिटिव ज़ोन होता है, जहाँ प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों, खतरनाक पदार्थों के भंडारण और कचरा डंपिंग पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है।

  • ज़ोन ऑफ़ इन्फ्लुएंस (10 किमी): 10 किमी के दायरे को ‘Zone of Influence’ माना जाता है। इस क्षेत्र में संचालित कोल डिपो से उड़ने वाली कोयले की धूल और प्रदूषण का प्रभाव सीधे तौर पर वेटलैंड्स के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पर पड़ता है, जिससे जलीय जीवों और प्रवासी पक्षियों पर गंभीर खतरा मंडराने लगता है।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here