Monday, August 31, 2026
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50 Percent Basic Salary Rule Labour Code 2026: सैलरी का 50% होगा बेसिक पे: जानें क्यों कम हो सकती है आपकी इन-हैंड सैलरी

नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-New Labour Law Impact On Take Home Salary: नए लेबर कोड (Labour Codes) के प्रभावी होने के साथ ही कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। नए नियमों के तहत कंपनियों को अपने पेरोल स्ट्रक्चर को पुनर्गठित करना होगा, जिसमें मूल वेतन (Basic Pay) और महंगाई भत्ता (DA) कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50 प्रतिशत होना अनिवार्य है। इस बदलाव का सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनकी कुल CTC में बेसिक पे की हिस्सेदारी कम है और विभिन्न भत्तों (Allowances) का अनुपात ज्यादा है।

50 प्रतिशत के नियम का मुख्य उद्देश्य कंपनियों द्वारा भत्तों के नाम पर बेसिक सैलरी को बहुत कम रखने की व्यवस्था पर अंकुश लगाना है।

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नए नियम के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी के भत्ते कुल वेतन के 50 प्रतिशत से अधिक हैं, तो 50 प्रतिशत की सीमा से ऊपर की अतिरिक्त राशि को स्वतः ही बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी की कुल सैलरी 60,000 रुपये है और बेसिक पे केवल 20,000 रुपये है, तो नए नियम के तहत बेसिक सैलरी की सीमा को बढ़ाकर 30,000 रुपये करना होगा।

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बेसिक सैलरी का दायरा बढ़ते ही कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का प्रोविडेंट फंड (PF) और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ जाएगा, क्योंकि पीएफ की गणना मूल वेतन के आधार पर की जाती है। पीएफ कटौतियों में बढ़ोतरी होने से कर्मचारियों को हर महीने मिलने वाली टेक-होम या इन-हैंड सैलरी (In-Hand Salary) कुछ कम हो सकती है।

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हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी कर्मचारियों का इन-हैंड वेतन घट जाएगा; यह पूर्णतः कंपनी की पेरोल नीति और कर्मचारी के मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर पर निर्भर करेगा। हालांकि, शॉर्ट-टर्म में इन-हैंड सैलरी कम होने के बावजूद लॉन्ग-टर्म में कर्मचारियों को बड़ा फायदा होगा, क्योंकि इससे उनकी रिटायरमेंट बचत निधि और ग्रेच्युटी की रकम में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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