Monday, August 31, 2026
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Joint Home Loan Rules After Divorce Explained: तलाक के बाद भी खत्म नहीं होती जॉइंट होम लोन चुकाने की जिम्मेदारी, जानें नियम

नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-Joint Home Loan Rules After Divorce Explained: शादी के बाद अक्सर पति-पत्नी मिलकर जॉइंट होम लोन के जरिए अपने सपनों का घर खरीदते हैं। लेकिन यदि किसी कारणवश दोनों के बीच तलाक हो जाता है, तो कानूनन भले ही दो लोग अलग हो जाएं, वित्तीय संस्थाओं से लिया गया लोन अपने-आप खत्म नहीं होता। बैंक के लिए दोनों पार्टनर्स मुख्य कर्जदार (Co-borrowers) बने रहते हैं। जब तक बकाए कर्ज का पूरी तरह से भुगतान न हो जाए या बैंक औपचारिक बदलाव के लिए सहमत न हो, तब तक लोन एग्रीमेंट की शर्तें दोनों पर समान रूप से लागू रहती हैं।

तलाक के बाद जॉइंट होम लोन को निपटाने के लिए मुख्य रूप से तीन कानूनी और वित्तीय विकल्प उपलब्ध होते हैं। पहला विकल्प यह है कि कोई एक पार्टनर घर का पूरा मालिकाना हक और बकाए लोन की जिम्मेदारी अपने नाम पर ट्रांसफर करा ले, जिसके लिए बैंक उसकी व्यक्तिगत आय और क्रेडिट स्कोर का नए सिरे से आकलन करता है।

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दूसरा विकल्प आपसी सहमति से संपत्ति को बेचकर उससे प्राप्त रकम से बैंक का पूरा बकाया चुकाने का है, जिसके बाद बची हुई राशि का दोनों आपस में बंटवारा कर सकते हैं। तीसरा विकल्प यह है कि लोन समाप्त होने तक दोनों तय अनुपात में अपनी-अपनी ईएमआई (EMI) भरते रहें।

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बैंकों को कर्जदार के व्यक्तिगत या वैवाहिक विवादों से कोई सरोकार नहीं होता; उन्हें केवल अपनी मासिक किश्तों से मतलब होता है। यदि कोर्ट तलाक के फैसले में किसी एक पार्टनर को लोन चुकाने की जिम्मेदारी दे भी दे, तब भी बैंक के रिकॉर्ड में दोनों तब तक देनदार बने रहते हैं जब तक कि ‘रिलीज डीड’ (Release Deed) की औपचारिक प्रक्रिया पूरी न हो जाए।

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ऐसे में यदि कोई भी एक पक्ष ईएमआई भरने से मुकरता है या डिफॉल्ट करता है, तो इसका सीधा असर दोनों के सिबिल (CIBIL) स्कोर पर पड़ता है। इस तरह के जोखिमों से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि जॉइंट लोन लेते समय ही एक ‘को-ओनरशिप एग्रीमेंट’ (Co-ownership Agreement) बनवा लेना चाहिए, जिसमें भविष्य के विवादों की स्थिति में ईएमआई भुगतान और मालिकाना हक की शर्तें स्पष्ट रूप से दर्ज हों।

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