सुकमा : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरे से पहले बस्तर क्षेत्र में सुरक्षाबलों को महत्वपूर्ण सफलता मिली है।सुकमा और बीजापुर जिलों में कुल 51 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ने और मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला किया।इनमें कई महिला नक्सली भी शामिल बताई जा रही हैं, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय थीं।
सुकमा में 21 माओवादियों ने डाले हथियार
सुकमा जिले में 21 माओवादियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने सरेंडर किया।इन सभी पर मिलाकर करीब 76 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिससे उनकी सक्रियता और प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने
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AK-47
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SLR
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इंसास राइफल
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भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री
सुरक्षाबलों को सौंप दी।
बढ़ते दबाव और पुनर्वास नीति का असर
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, लगातार चल रहे एंटी-नक्सल ऑपरेशन, बढ़ते सुरक्षाबलों के दबाव और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर माओवादियों ने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना।सरेंडर करने वाले नक्सली मुख्य रूप से दरभा डिवीजन और ओडिशा सीमा क्षेत्र में सक्रिय थे।
मुख्यधारा में लौटने का अवसर
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।यह कदम न केवल व्यक्तिगत पुनर्वास बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
शांति की ओर बढ़ता बस्तर
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहे सरेंडर यह दर्शाते हैं कि
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हिंसक विचारधारा कमजोर पड़ रही है
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विकास योजनाओं का असर जमीन पर दिख रहा है
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स्थानीय लोगों का भरोसा शासन पर बढ़ रहा है
ऐसे में अमित शाह के दौरे से पहले हुआ यह सामूहिक आत्मसमर्पण बस्तर में बदलते हालात का मजबूत संदेश माना जा रहा है।









