रोशन सेन/माकड़ी – बस्तर अंचल का प्रमुख पर्व नवा खाई मंगलवार को ग्राम बागबेड़ा में बड़ी ही धूमधाम और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। नवा खाई बस्तर के आदिवासियों का सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन शैली और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक है। यह नई फसल की खुशी और पूर्वजों की स्मृति को समर्पित पर्व माना जाता है।
नई फसल पकते ही परिवारजन मिलकर धान का चिवड़ा (चूड़ा) तैयार करते हैं। सबसे पहले इसे देवताओं और पूर्वजों को अर्पित किया जाता है, उसके बाद परिवारजन कुहड़ी पत्ते में परोसे गए चिवड़े का सेवन करते हैं। परंपरा के अनुसार इस दिन बच्चों को मिट्टी के खिलौने भेंट किए जाते हैं और गांव में गीत, संगीत और नृत्य के साथ उत्सव का माहौल रहता है। यह पर्व सामाजिक एकता, पारंपरिक ज्ञान और संस्कृति संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है।
ग्राम बागबेड़ा में नवा खाई पर्व के अवसर पर पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया। इसमें जलेबी दौड़, रस्साकसी, गेड़ी दौड़ और मटकी फोड़ जैसे खेल रखे गए। प्रतियोगिताओं में विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया।
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त्योहार को सफल बनाने में ग्रामवासियों ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया। सहयोग राशि प्रदान करने वालों में बिरजू राम मरकाम, दयाराम मरकाम, महेश नेताम, महेश मरकाम, गौतम नेताम, संतलाल नेताम, वीरेंद्र मरकाम, अंबी मरकाम और चमरा राम मरकाम सहित कई लोग शामिल रहे।
नवा खाई पर्व ने एक बार फिर गांव के बच्चों और युवाओं में पारंपरिक शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का अवसर दिया।











