Municipal Corporation Singrauli : सिंगरौली: नगर पालिक निगम सिंगरौली के वार्ड क्रमांक 42 में इन दिनों विकास कार्यों की आड़ में घटिया निर्माण का मामला गर्माता जा रहा है। लगभग 50 से 55 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही नाली की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय पार्षद ने मोर्चा खोल दिया है। पार्षद का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा न केवल मानकों की अनदेखी की जा रही है, बल्कि निर्माण में तकनीकी खामियां भी छोड़ी जा रही हैं, जो भविष्य में जलभराव और गंदगी की बड़ी समस्या बन सकती हैं।
पार्षद के अनुसार, नाली निर्माण में सबसे बड़ी लापरवाही इसके ‘लेवल’ (सतह के ढलान) को लेकर की गई है। यदि नाली का लेवल सही नहीं होगा, तो पानी की निकासी बाधित होगी। इसके अलावा, निर्माण सामग्री में भी बड़े पैमाने पर खेल होने का दावा किया गया है। आरोप है कि जहां उच्च गुणवत्ता वाली रेत और सीमेंट का मिश्रण होना चाहिए, वहां बेहद घटिया और दोयम दर्जे की सामग्री का उपयोग कर सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है। स्थानीय निवासियों ने भी इस कार्य पर असंतोष जताते हुए इसे केवल औपचारिकता बताया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पार्षद ने नगर निगम आयुक्त और कार्यपालन यंत्री को लिखित शिकायत सौंपी है। पार्षद का कहना है कि बार-बार अवगत कराने के बावजूद निर्माण कार्य में सुधार नहीं किया गया, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस निर्माण को मानकों के अनुरूप दुरुस्त नहीं किया गया और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला प्रशासन और शासन स्तर पर इस मुद्दे को उठाएंगे।
दूसरी ओर, विभाग ने अब इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। नगर निगम के इंजीनियर विपिन तिवारी ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य की जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन हिस्सों में गुणवत्ता खराब पाई गई है, उन्हें ध्वस्त कर नए सिरे से बनवाया जाएगा। साथ ही, संबंधित ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी कर वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन की इस सख्ती का असर धरातल पर कितना दिखता है।











