निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम रुख स्पष्ट कर दिया है। गुरुवार को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने सभी याचिकाओं को वापस जबलपुर हाईकोर्ट भेज दिया। साथ ही, बढ़ाए गए 13 प्रतिशत अतिरिक्त ओबीसी आरक्षण पर लगी अंतरिम रोक को फिलहाल जारी रखा गया है।
अदालत ने कहा कि यह मामला राज्य कानून, संवैधानिक सीमाओं और तथ्यात्मक जांच से जुड़ा है, इसलिए इसकी विस्तृत सुनवाई हाईकोर्ट स्तर पर ही उचित होगी।
राज्य सरकार को नहीं मिली अंतरिम राहत
मध्यप्रदेश सरकार और ओबीसी वेलफेयर कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत की मांग की थी। उनकी प्रमुख मांग थी कि प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण को लागू माना जाए और जिन भर्तियों के परिणाम अतिरिक्त 13% कोटे के कारण रुके हुए हैं, उन्हें जारी करने की अनुमति दी जाए।हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए पूरा मामला हाईकोर्ट को सौंप दिया।
2019 से चल रहा है विवाद
यह विवाद वर्ष 2019 में शुरू हुआ था, जब तत्कालीन राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% कर दिया था। इस फैसले के बाद प्रदेश में कुल आरक्षण 63% तक पहुंच गया, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 50% की अधिकतम सीमा से अधिक माना गया।इसी के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट ने बढ़े हुए 13% आरक्षण पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जो अब तक जारी है।
आगे क्या होगा
अब इस पूरे मामले की संवैधानिक वैधता और कानूनी परीक्षण हाईकोर्ट में ही होगा। ऐसे में प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों और ओबीसी वर्ग की निगाहें आने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं।हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय न केवल भर्ती प्रक्रियाओं बल्कि राज्य की आरक्षण नीति और राजनीतिक परिदृश्य पर भी दूरगामी असर डाल सकता है।













