सिंगरौली। जिला मुख्यालय से कुछ किलोमीटर दूर स्थित गनियारी क्षेत्र में यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नज़र आ रही है। यहां प्रशासन द्वारा लगाए गए नो एंट्री बोर्ड अब सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं। भारी वाहनों का लगातार आवागमन न केवल यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि स्कूली बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, प्रशासन ने क्षेत्र में नो एंट्री व्यवस्था इसलिए लागू की थी ताकि स्कूल-कॉलेज के समय भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई जा सके। लेकिन यातायात थाना प्रभारी की ढिलाई के चलते ट्रक और रेत वाहनों की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही।
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नो एंट्री में धड़ल्ले से दौड़ते रेत वाहन
गनियारी मार्ग पर रोजाना सैकड़ों भारी वाहन निर्धारित समय से पहले ही नो एंट्री जोन में घुस आते हैं। ये वही मार्ग हैं, जहां कॉलेज और स्कूल स्थित हैं। तेज रफ्तार से गुजरते ट्रक स्थानीय लोगों में भय का माहौल पैदा कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि “बच्चों को स्कूल भेजते वक्त अब डर लगता है, क्योंकि ट्रक ड्राइवर नियमों की परवाह नहीं करते।”
‘तीसरी आंख’ भी बेअसर साबित
यातायात व्यवस्था पर नजर रखने के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे भी कोई राहत नहीं दे पा रहे हैं। कैमरों के सामने ही नियमों का उल्लंघन होता है, लेकिन कार्रवाई सिर्फ दोपहिया चालकों तक सीमित दिखाई देती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि “सीसीटीवी फुटेज में सब कुछ रिकॉर्ड होता है, फिर भी बड़े वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।”
बड़े वाहनों पर मेहरबान यातायात प्रभारी?
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि यातायात थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। छोटे वाहनों पर चालान की कार्रवाई तो रोज होती है, लेकिन नियम तोड़ने वाले भारी वाहनों पर कोई सख्ती नहीं की जाती। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि कहीं अंदरखाने मिलीभगत तो नहीं है।
क्षेत्रीय निवासियों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और नो एंट्री नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों व अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।











