नई दिल्ली / भोपाल: मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और उनके सहयोगी पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल तथा विधायक लखन घनघोरिया के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला कोर्ट में पहुंच गया है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने सभी तीन नेताओं को 16 जनवरी 2026 को उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है। मामला नेशनल हेल्थ मिशन से जुड़े पुराने विवाद से संबंधित है।
फर्जी अंकसूची का आरोप
मामला 5 अगस्त 2025 को विधानसभा सत्र के दौरान उठा था, जब विपक्ष ने नेशनल हेल्थ मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक विजय पांडे पर फर्जी अंकसूची के सहारे नौकरी पाने का आरोप लगाया था। इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और अन्य विधायकों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और विधानसभा से वॉकआउट भी किया। हंगामे के बाद मिशन संचालक सलोनी सिडाना ने विजय पांडे को अस्थायी रूप से पद से हटाया था।
जांच में आरोप असत्य पाए गए
विरोध के बाद विजय पांडे ने विपक्षी नेताओं पर आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया। विभागीय जांच और एमपी शिक्षा बोर्ड की रिपोर्ट में पांडे की अंकसूची सही और वैध पाई गई। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि विपक्ष के आरोप तथ्यहीन और भ्रामक थे, और उनके आधार पर सरकार को घेरने का प्रयास किया गया।
कोर्ट ने नोटिस जारी किया
एमपी-एमएलए कोर्ट ने अब उमंग सिंघार, अजय सिंह राहुल और लखन घनघोरिया को 16 जनवरी 2026 को कोर्ट में पेश होकर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है। कोर्ट नोटिस में कहा गया कि आरोपियों को अपने बयान और साक्ष्यों के साथ उपस्थित होना होगा।
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विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विपक्ष के संसदीय आचरण और मीडिया के माध्यम से आरोप लगाने के दायरे को भी परखता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कोर्ट की प्रक्रिया से स्पष्ट हो जाएगा कि विपक्ष ने किस हद तक आरोपों की सत्यता पर ध्यान दिया।











