Minister OP Choudhary: रायपुर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के डिबेट चैलेंज और SIR को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के विशेष सत्र बुलाने के बयान पर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता उन्हें नकार चुकी है और 100 से अधिक बार पराजय का स्वाद चखा चुकी है। अब राहुल गांधी अपनी राजनीतिक हाइट बढ़ाने के लिए डिबेट की बात कर रहे हैं।
ओपी चौधरी ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी को जॉइंट पार्लियामेंट या संसद के विशेष सत्र में चर्चा का प्रस्ताव दिया है, लेकिन राहुल गांधी इससे दूर भागेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी केवल अपनी पॉलिटिकल हाइट बढ़ाने के लिए चिल्ला रहे हैं।
5 लाख पीपल के पेड़ लगाने का लक्ष्य
मंत्री ओपी चौधरी ने रायगढ़ को ‘पीपल सिटी’ के रूप में विकसित करने की योजना की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को ‘विकसित भारत संकल्प पीपल वन’ का लोकार्पण किया था। उन्होंने कहा कि पहले एक लाख पीपल के पेड़ लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 5 लाख कर दिया गया है। इस पहल के जरिए क्षेत्र को पीपल सिटी के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
वंदे मातरम के अधूरे गायन पर नोटिस जारी
रायगढ़ के एक कॉलेज में वंदे मातरम का पूरा गायन नहीं होने के मामले पर भी वित्त मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कॉलेज में वंदे मातरम का अधूरा गायन हुआ था, जिसके बाद गायन पूरा कराया गया। इस मामले में कलेक्टर ने प्रशासनिक सख्ती दिखाते हुए नोटिस जारी किया है। ओपी चौधरी ने लोगों से वंदे मातरम एक्ट का पालन करते हुए व्यवहार करने की अपील की।
Minister OP Choudhary: नक्सलवाद खत्म होने के बाद बस्तर में विकास की नई संभावनाएं
Minister OP Choudhary: बस्तर के विकास को लेकर मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण कर प्रदेशवासियों को बड़ी सौगात दी थी। इसके लिए छत्तीसगढ़ की जनता उनकी आभारी है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद बस्तर में विकास की नई संभावनाएं सामने आई हैं। आने वाले समय में बस्तर पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा और छत्तीसगढ़ के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वहीं कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के हित में राज्य निर्माण का फैसला नहीं लिया था।