Dhanteras 2026: धनतेरस का नाम सुनते ही सोना-चांदी और नए बर्तन खरीदने की परंपरा याद आती है। लेकिन इस त्योहार का संबंध सिर्फ धन-दौलत से नहीं, बल्कि अच्छी सेहत और लंबी उम्र की कामना से भी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है। यही वजह है कि धनतेरस पर उनकी पूजा करके लोग परिवार की अच्छी सेहत और खुशहाली की कामना करते हैं।
समुद्र मंथन से कैसे प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि?
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। इसका मकसद अमृत प्राप्त करना था। इसके लिए मंदराचल पर्वत को मथनी और नागराज वासुकि को रस्सी बनाया गया। भगवान विष्णु ने कच्छप अवतार लेकर पर्वत को अपनी पीठ पर सहारा दिया। समुद्र मंथन से कई अनमोल चीजें निकलीं और अंत में भगवान धन्वंतरि अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए।
हाथों में अमृत कलश लेकर क्यों आए थे धन्वंतरि?
धार्मिक मान्यताओं में अमृत को अमरता और जीवन की रक्षा का प्रतीक माना गया है। समुद्र मंथन का उद्देश्य देवताओं को अमृत देना था, ताकि वे असुरों के मुकाबले अपनी शक्ति बनाए रख सकें। भगवान धन्वंतरि का अमृत कलश लेकर आना इसी कथा का अहम हिस्सा है।
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक भी माना जाता है। उनके हाथों में अमृत कलश को अच्छी सेहत, रोगों से बचाव और लंबी उम्र की कामना से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए धनतेरस पर उनकी पूजा का महत्व सिर्फ धन तक सीमित नहीं रहता।
धनतेरस पर क्यों होती है धन्वंतरि पूजा?
मान्यता है कि कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे। इसी वजह से इस दिन को धनतेरस कहा जाता है। लोग पूजा के दौरान भगवान धन्वंतरि से परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। कई जगह इस दिन दीप जलाने और नई चीजें खरीदने की परंपरा भी निभाई जाती है।
धनतेरस की परंपरा यह याद दिलाती है कि जीवन में धन के साथ सेहत भी जरूरी है। अच्छी दिनचर्या, संतुलित खानपान और शरीर की देखभाल पर ध्यान देना भी उतना ही अहम है। भगवान धन्वंतरि की पूजा इसी कामना के साथ की जाती है कि परिवार स्वस्थ और खुशहाल रहे।