निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : देश में एक बार फिर दवाइयों की कीमतें बढ़ने जा रही हैं। नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने करीब 0.65 प्रतिशत तक दाम बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इससे पहले साल 2025 में भी दवाओं के दाम बढ़ाए गए थे।
कंपनियों को मिली बड़ी राहत
NPPA के नए आदेश के मुताबिक, अब दवा कंपनियों को MRP बढ़ाने के लिए अलग से सरकारी मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। कंपनियां सालाना महंगाई दर के अनुसार कीमतों में बढ़ोतरी कर सकेंगी।
Read More : M.P News : रीवा में अवैध कॉलोनियों पर बड़ा एक्शन! शाही बिल्डर्स पर FIR के आदेश, प्रशासन सख्त
आम आदमी की जेब पर असर
दवाइयों की कीमत बढ़ने का सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। पहले से ही महंगाई का सामना कर रहे लोगों के लिए इलाज का खर्च और बढ़ सकता है, खासकर उन मरीजों के लिए जो नियमित दवाएं लेते हैं।
कच्चे माल की कीमतों में उछाल
दवा कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल, केमिकल कंपोनेंट्स, प्लास्टिक और एल्युमिनियम की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके चलते उत्पादन और पैकेजिंग लागत बढ़ गई है।
जरूरी दवाओं के दाम में बड़ा इजाफा संभव
कुछ प्रमुख दवाओं के कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है:
- पेरासिटामोल: करीब 47% बढ़ोतरी
- सिप्रोफ्लाक्सासिन: 60% तक बढ़ोतरी
- अमोक्सिसिलिन ट्राईहाइड्रेट: 45%
- डाइक्लोफेनेक: 54%
- डाइक्लोफेनेक पोटेशियम: 33%
इन बढ़ती लागतों का असर बाजार में दवाओं की कीमतों पर साफ दिखाई दे सकता है।
📦 मेडिकल उपकरण भी होंगे महंगे
सिर्फ दवाएं ही नहीं, बल्कि मेडिकल उपकरणों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और अन्य सामग्री महंगी होने से लागत बढ़ रही है।











