Mauganj News : अभय मिश्रा /मऊगंज :आस्था से भरी यात्रा, संयुक्त परिवार की खुशियां, और रामलला के दर्शन का उत्साह—गुरुवार तड़के एक ऐसी चीख में बदल गया जिसने मऊगंज जिले के पूरे बेलहई गांव को सुन्न कर दिया। अयोध्या से सिर्फ 10 किलोमीटर पहले बोलेरो और ट्रैक्टर-ट्रॉली की भीषण भिड़ंत ने परिवार के तीन सदस्यों की जिंदगी छीन ली, जबकि आठ लोग गंभीर रूप से घायल हैं। और इस हृदयविदारक मंजर के बीच इंसानियत भी शर्मसार हो गई—लाशों के पास से मोबाइल और पर्स चोरी हो गए।
Mauganj News : एकता का प्रतीक रहा परिवार, एक पल में बिखर गया
Mauganj News : बेलहई गांव का यह संयुक्त परिवार अपने सौहार्द और एकता के लिए मिसाल माना जाता था। 10 दिसंबर की रात परिवार के 10 सदस्य खुशी-खुशी अयोध्या के लिए निकले थे… पर सुबह 5 बजे एक तेज धमाके ने उनकी दुनिया उजाड़ दी।हादसे में मीराबाई पटेल, अंकिता पटेल और चालक रामयश मिश्रा की मौके पर ही मौत हो गई।घायल शशी पटेल, चंद्रकली पटेल, चित्रसेन पटेल और दीपक पटेल की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
Mauganj News : लाशें पड़ी थीं… लोग मोबाइल उठा ले गए
Mauganj News : परिजनों ने रोते हुए बताया—हमारे लोग सड़क पर पड़े थे… शरीरों से खून बह रहा था… और कुछ लोग मोबाइल–पर्स उठा ले गए। क्या इतनी भी इंसानियत नहीं बची?यह बयान पूरे हादसे से भी अधिक करुण और पीड़ादायक है।
Mauganj News : पापा, शादी के बाद आ जाऊँगी…— अंकिता की आखिरी बात
Mauganj News : पिता सरोज मणि पटेल—जो अहमदाबाद में सुरक्षा गार्ड हैं—बोल भी नहीं पा रहे उन्होंने 16 नवंबर को स्टेशन तक अपनी बेटी और बेटे को छोड़ा था… जाते-जाते बेटी बोली—पापा, शादी के बाद आ जाऊँगी।… आज मेरी बिटिया ही नहीं रही।
सुबह 7 बजे पुलिस का फोन आया और जैसे ही उन्होंने घटना के बारे में बताया तो मेरा पूरा संसार ढह गया।
Mauganj News : मीराबाई की आखिरी हिदायत आज भी कानों में गूंज रही है
महेंद्र मणि पटेल बताते हैं—रात 11 बजे छोड़ा था… जाते-जाते बोली थीं—दूध-शक्कर रखी है, चावल-दाल रखी है… दोपहर में गरम कर लेना…
दूसरे दिन बेटे का फोन आया—
पापा… मां अब नहीं रहीं।
ये शब्द सुन कर … कलेजा टूट गया।
दो साल का शिवांश बार-बार पूछ रहा— ‘मां कहां है
मीराबाई की गोद में खेलने वाला छोटा शिवांश रो-रोकर एक ही बात पूछ रहा है—“मां कहां गई?”कोई उसे सच बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा।
उसकी मां शशी अस्पताल में जिंदगी से लड़ रही हैं, और अपनी गोद में प्यार देने वाली दादी हमेशा के लिए चली गईं।
गांव में मातम, हर घर से रोने की आवाजें
शुक्रवार को जब मीराबाई और अंकिता के शव गांव पहुंचे, तो सैकड़ों लोग फफक पड़े। हवा में मातम और चीखें तैर रही थीं।चालक रामयश मिश्रा का अंतिम संस्कार उनके गांव बधवा में हुआ।
परिवार की गुहार—“हमारे घायल बचा लो
चार सदस्य अभी भी गंभीर स्थिति में अस्पताल में हैं। परिवार प्रशासन से उपचार के लिए तत्काल मदद की मांग कर रहा है।
यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं…
Mauganj News : यह हमारे समय का कड़वा सच है—
हाँ, सड़कें खतरनाक हैं…पर उससे भी ज्यादा खतरनाक है वह समाज, जहाँ लाशों के पास भी इंसानियत दम तोड़ देती है।









