Thursday, September 24, 2026
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50 साल से बिना नींद ज़िंदगी! रीवा के रिटायर्ड ज्वाइंट कलेक्टर बने मेडिकल मिस्ट्री… नींद के बिना भी पूरी तरह स्वस्थ

रीवा :   कहते हैं कि इंसान अगर कुछ दिनों तक न सोए तो शरीर जवाब दे देता है, लेकिन मध्य प्रदेश के रीवा जिले में रहने वाले एक व्यक्ति ने इस धारणा को ही चुनौती दे दी है। रीवा के रिटायर्ड ज्वाइंट कलेक्टर मोहन लाल द्विवेदी पिछले करीब 50 वर्षों से बिना नींद के जीवन जी रहे हैं, फिर भी उनका स्वास्थ्य पूरी तरह सामान्य है। यह मामला न सिर्फ आम लोगों, बल्कि डॉक्टरों और मेडिकल साइंस के लिए भी एक रहस्य बना हुआ है।

इमरजेंसी के बाद चली गई नींद

करीब 75 वर्षीय मोहन लाल द्विवेदी बताते हैं कि उन्होंने आखिरी बार इमरजेंसी के दौर में चैन की नींद ली थी। उसके बाद से आज तक उन्हें नींद नहीं आई। उनकी पलकें बंद होती हैं, लेकिन दिमाग कभी सोता नहीं। न झपकी आती है और न ही गहरी नींद।

नींद नहीं, फिर भी थकान नहीं

हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय तक नींद न लेने के बावजूद उन्हें न थकान महसूस होती है और न ही कमजोरी। वह घंटों एक ही मुद्रा में बैठ सकते हैं और लगातार काम कर सकते हैं। न मांसपेशियों में दर्द होता है और न ही किसी तरह की शारीरिक परेशानी।

कार्यशैली से कर्मचारी भी रहते थे हैरान

नौकरी के दौरान उनकी कार्यशैली अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय रहती थी। उनके अधीनस्थ कर्मचारी उनके साथ काम करने से कतराते थे, क्योंकि वे बिना रुके लंबे समय तक काम करते थे। बाणसागर बांध परियोजना के दौरान वे कई किलोमीटर पैदल चलते थे, लेकिन थकान का नामोनिशान नहीं होता था।

देश के बड़े डॉक्टर भी नहीं ढूंढ पाए कारण

नींद न आने की समस्या को लेकर उन्होंने मुंबई और दिल्ली के नामी डॉक्टरों से इलाज कराया। योग, प्राणायाम, आयुर्वेद और झाड़-फूंक तक सब कुछ आज़माया, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अब यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है।

मेडिकल साइंस के लिए अब भी पहेली

50 साल बिना नींद के जीवन जीना विज्ञान के लिए भी एक अनसुलझी गुत्थी है। मोहन लाल द्विवेदी का यह मामला आज भी डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के लिए सवाल बना हुआ है।

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