Saturday, August 22, 2026
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MP News: मध्य प्रदेश-UP के बीच बिजली की कमी से निपटने के लिए बड़ा समझौता, 2000 MW को लेकर समझौता

MP UP Power Agreement: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश ने बिजली संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और बिजली खरीद पर होने वाले खर्च को कम करने के लिए अहम समझौता किया है। शुक्रवार को लखनऊ में दोनों राज्यों की बिजली कंपनियों के बीच पूरक बिजली खरीद और लंबे समय की फर्म पावर बैंकिंग व्यवस्था को लेकर सहमति बनी।MP UP बिजली समझौता ऐसे समय हुआ है, जब दोनों राज्यों में अलग-अलग मौसम में बिजली की मांग बढ़ती है। नई व्यवस्था के तहत एक राज्य में कम मांग के समय बची बिजली को दूसरे राज्य की ज्यादा मांग के दौरान इस्तेमाल किया जा सकेगा।

मध्य प्रदेश बिजली खरीद योजना के तहत दोनों राज्यों में कुल 2000 मेगावाट पीक पावर क्षमता की खरीद प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए की जाएगी। इसका मकसद जरूरत के समय बिजली की उपलब्धता बढ़ाना और बिजली खरीद की लागत को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना है।अधिकारियों के अनुसार मध्य प्रदेश में अक्टूबर से मार्च के बीच रबी सीजन के दौरान कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग बढ़ जाती है। इस अवधि में राज्य को अतिरिक्त बिजली की जरूरत होती है।

गर्मी में यूपी की बढ़ती मांग का मिलेगा फायदा
MP UP पावर बैंकिंग व्यवस्था में दोनों राज्यों की बिजली मांग के अलग-अलग समय का फायदा उठाने की योजना है। उत्तर प्रदेश में मई से सितंबर के दौरान गर्मी और खरीफ सीजन के कारण बिजली की खपत बढ़ जाती है।ऐसे में जिस समय मध्य प्रदेश में बिजली की मांग अपेक्षाकृत कम होगी, उस समय उपलब्ध अतिरिक्त बिजली का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश की जरूरत पूरी करने में किया जा सकता है। इसी तरह जरूरत के अनुसार दोनों राज्यों के बीच बिजली का उपयोग किया जा सकेगा।

एक राज्य की बची बिजली दूसरे के काम आएगी
MP UP Electricity Agreement का सबसे अहम हिस्सा पावर बैंकिंग व्यवस्था है। इसके तहत बिजली को केवल तत्काल बिक्री तक सीमित रखने के बजाय जरूरत के अलग-अलग समय के हिसाब से इस्तेमाल किया जा सकेगा।इससे बिजली उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग हो सकता है। साथ ही कम मांग के समय उपलब्ध संसाधनों को बेकार रहने से बचाने में मदद मिलेगी।
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14 हजार करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद
MP UP Power Deal से बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में करीब 14 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना भी जताई गई है। अगर प्रस्तावित निवेश जमीन पर आता है तो इससे नई बिजली और ऊर्जा अधोसंरचना विकसित करने में मदद मिल सकती है।इसके साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट आने से रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने में भी इस समझौते की भूमिका हो सकती है।

महंगी बिजली खरीद पर निर्भरता घटेगी
MP Electricity Cost Reduction के लिहाज से भी यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फर्म पावर बैंकिंग के जरिए दोनों राज्य अपनी जरूरत के अनुसार अतिरिक्त बिजली का उपयोग कर सकेंगे।इससे कम मांग के समय बिजली उत्पादन क्षमता के कम इस्तेमाल की स्थिति को घटाया जा सकता है। साथ ही जरूरत पड़ने पर महंगी अल्पकालिक बिजली खरीदने की निर्भरता भी कम हो सकती है।

ग्रिड और बिजली सप्लाई को मिलेगी मजबूती
MP UP Energy Security के तहत नई व्यवस्था से बिजली ग्रिड में लचीलापन बढ़ने की उम्मीद है। अलग-अलग मौसम में बिजली की मांग को ध्यान में रखते हुए संसाधनों का इस्तेमाल होने से आपूर्ति को ज्यादा बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा।इससे दोनों राज्यों में ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

दोनों बिजली कंपनियों ने किया समझौता
MP UP Power Agreement पर एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के मुख्य महाप्रबंधक जीएस खनूजा और उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के निदेशक दीपक रैजादा ने हस्ताक्षर किए।इस समझौते के जरिए दोनों राज्य अपनी अलग-अलग बिजली मांग के समय का बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश करेंगे। आने वाले समय में इसकी वास्तविक उपयोगिता बिजली खरीद, पावर बैंकिंग और ऊर्जा परियोजनाओं के स्तर पर दिखाई देगी।

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