खंडवा/ओंकारेश्वर। Nishaanebaz.com-Omkareshwar Bandh Controversy: मध्य प्रदेश की पवित्र और प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर में स्थानीय नागरिक परिषद के आह्वान पर किए गए दो दिवसीय बंद का बेहद व्यापक और गहरा असर देखने को मिला है। स्थानीय दुकानदारों, होटल व गेस्ट हाउस संचालकों, व्यापारियों और ऑटो चालकों ने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में अपने प्रतिष्ठान पूरी तरह से बंद रखे। इसका सबसे बड़ा और सीधा असर दूर-दराज से देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे उन हजारों श्रद्धालुओं पर पड़ा, जो भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन की आस लेकर आए थे। आलम यह रहा कि भक्तों को भगवान को अर्पित करने के लिए न तो फूल मिले और न ही प्रसाद नसीब हुआ।
सन्नाटे में डूबी तीर्थनगरी, पैदल चलने को मजबूर हुए भक्त
सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़, दुकानों की रौनक और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गुंजायमान रहने वाली यह नगरी बंद के दौरान पूरी तरह से सन्नाटे की आगोश में नजर आई। बाजार बंद रहने से स्थानीय कारोबार जहां पूरी तरह ठप हो गया, वहीं बाहर से आए श्रद्धालुओं को कदम-कदम पर भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऑटो सेवाएं पूरी तरह बंद होने के कारण श्रद्धालुओं को बस स्टैंड से लेकर मुख्य मंदिर तक का लंबा सफर पैदल ही तय करना पड़ा। इसके अलावा, खाने-पीने और दैनिक जरूरत की अन्य वस्तुएं हासिल करने में भी लोगों को खासी मशक्कत करनी पड़ी।
दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने जाहिर की निराशा
दिल्ली से पहली बार ओंकारेश्वर के दर्शन करने पहुंचीं श्रद्धालु साईं दीपा ने अपनी गहरी निराशा जाहिर करते हुए बताया कि यहाँ पहुँचने के बाद ही उन्हें स्थानीय लोगों के विरोध प्रदर्शन की जानकारी मिली। तीर्थनगरी में ऐसा गतिरोध देखकर उन्हें काफी दुख हुआ। दीपा का कहना था कि शासन-प्रशासन को स्थानीय नागरिकों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और उनके व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखते हुए ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे भविष्य में बाहर से आने वाले पर्यटकों को परेशानी न उठानी पड़े।
वहीं, दिल्ली से ही आए एक अन्य श्रद्धालु आकाश गर्ग ने बताया कि उनकी बड़ी इच्छा भगवान को प्रसाद चढ़ाने की थी, लेकिन सभी दुकानें बंद होने के कारण उन्हें बिना प्रसाद के ही दर्शन करने पड़े। आकाश ने कहा कि यहाँ कई परिवार पीढ़ियों से व्यवसाय कर रहे हैं और तीर्थनगरी के विकास में उनका अहम योगदान है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन और स्थानीय नागरिकों को बैठकर कोई ऐसा बीच का रास्ता निकालना चाहिए जिससे रोजगार भी सुरक्षित रहे और श्रद्धालुओं की सुविधाएं भी बाधित न हों।
कलेक्टर ऋषव गुप्ता का बड़ा बयान—”जब तक सड़क नहीं बनती, नहीं होगा विस्थापन”
इस पूरे विवाद के मूल में आगामी सिंहस्थ (Simhastha) की विशाल तैयारियां और स्थानीय निवासियों के विस्थापन का डर है। इस संवेदनशील मामले पर खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करते हुए बताया कि आने वाले समय में ओंकारेश्वर और ममलेश्वर में सिंहस्थ का आयोजन होना है। सिंहस्थ के सुचारू संचालन और सुरक्षा के लिए कुछ होल्डिंग एरियाज, क्राउड कंट्रोल (भीड़ नियंत्रण) के स्थान तथा यूटिलिटी ब्लॉक्स (जैसे शौचालय और पेयजल व्यवस्था) विकसित करने की आवश्यकता है। इन बुनियादी सुविधाओं के निर्माण के चलते क्षेत्र में कुछ सड़कों के चौड़ीकरण की संभावनाएं बन रही हैं।
कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने स्पष्ट किया कि ओंकारेश्वर के नागरिकों द्वारा प्रशासन को कुल 18 बिंदु सौंपे गए थे, जिसमें उनकी सभी मांगें और चिंताएं शामिल थीं। प्रशासन ने इन सभी 18 बिंदुओं पर पूरी गंभीरता से विचार किया है और लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बन गई है। पुनर्विस्थापन को लेकर ‘डुइकिया’ की जगह को लेकर जो स्थानीय लोगों को दूरी की आपत्ति थी, उस पर भी चर्चा हो चुकी है। कलेक्टर ने भरोसा दिलाया है कि ‘डुइकिया’ कोई अंतिम विकल्प नहीं है, और सभी की सहमति से अन्य नई जगह का चयन भी किया जा सकता है।
इसके साथ ही, कलेक्टर ने यह सबसे बड़ा आश्वासन दिया है कि क्षेत्र में अभी टू-लेन सड़क का निर्माण होने वाला है, जो आगे चलकर फोर-लेन से सीधा जुड़ेगा। जब तक यह सड़क निर्माण कार्य पूरी तरह पूरा नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रकार की विस्थापन या हटाने की कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस स्पष्ट और पक्का आश्वासन के बाद अब तीर्थनगरी में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद बंध गई है।