भोपाल। Bhopal Upper Lake Mining: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की जीवन रेखा कहे जाने वाले बड़े तालाब के जलभराव क्षेत्र में कथित अवैध खनन का एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और खनिज विभाग को तत्काल मौके पर पहुंचकर निष्पक्ष जांच करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। हरित अधिकरण ने अपने आदेश में स्पष्ट तौर पर रेखांकित किया है कि यदि स्थलीय निरीक्षण और जांच के दौरान अवैध उत्खनन या खनिजों के अवैध परिवहन की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ संबंधित पर्यावरणीय एवं खनन नियमों के तहत बिना किसी ढिलाई के सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यह पूरा मामला भोपाल के रातीबड़ क्षेत्र अंतर्गत आने वाले कलखेड़ा-मालीखेड़ी इलाके का है, जहां बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन किए जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं। मामले की संवेदनशीलता और पर्यावरणीय खतरे को देखते हुए एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने इस विषय पर स्वतः संज्ञान लेते हुए न्यायिक सुनवाई शुरू की। सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण के समक्ष यह चौंकाने वाली जानकारी प्रस्तुत की गई कि बड़े तालाब के जलभराव क्षेत्र और उसके आसपास लगभग पांच अलग-अलग स्थानों पर अवैध रूप से पत्थर और गिट्टी का भारी उत्खनन किया जा रहा है।
अवैध उत्खनन के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्र में भारी-भरकम डंपरों की लगातार आवाजाही होने की बात भी सामने आई है। जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से अति संवेदनशील माने जाने वाले बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में इस तरह की अनियंत्रित गतिविधियों से न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है, बल्कि भूजल स्तर और तालाब की जल भंडारण क्षमता पर भी गहरा विपरीत असर पड़ने की गंभीर आशंका जताई गई है। भारी वाहनों की निरंतर आवाजाही और उत्खनन कार्य से आसपास के जल स्रोतों के दूषित होने का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि भोपाल का बड़ा तालाब न केवल शहर की एक बड़ी आबादी की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति करता है, बल्कि यह एक समृद्ध जैव विविधता वाला संरक्षित क्षेत्र भी है। ऐसे महत्वपूर्ण कैचमेंट एरिया में हो रही व्यावसायिक गतिविधियों की जांच और उन पर रोक लगाना पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद आवश्यक माना जा रहा है। एनजीटी के इस कड़े रुख के बाद अब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और खनिज विभाग की संयुक्त टीम द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का स्थल निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर अवैध गतिविधियों में शामिल तत्वों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।