[Nishaanebaz News] MP News:प्रदीप शर्मा\ भिंड। डिजिटल व्यवस्था और ई-अटेंडेंस को लेकर सरकारी सख्ती के बीच मध्य प्रदेश के भिंड जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर बबेड़ी पंचायत के नदरौली गांव में स्कूल पहुंचने के लिए शिक्षकों को हर दिन उफनती बेसली नदी पार करनी पड़ रही है। न पुल है, न सुरक्षित रास्ता और न ही बारिश के दिनों में कोई वैकल्पिक व्यवस्था। ऐसे में शिक्षक हवा भरे ट्यूब के सहारे जान जोखिम में डालकर नदी पार कर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।
मामला सिर्फ स्कूल तक पहुंचने की मुश्किल का नहीं, बल्कि ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता और समय पर उपस्थिति दर्ज कराने के दबाव का भी है। शिक्षकों का कहना है कि यदि वे निर्धारित समय पर स्कूल नहीं पहुंचते और ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होती, तो वेतन कटने, अनुपस्थिति दर्ज होने और विभागीय कार्रवाई का डर बना रहता है।
उफनती बेसली नदी पार कर पहुंचते हैं शिक्षक
नदरौली प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ शिक्षक राजेश भारती, देवेंद्र कुशवाह, महेंद्र भदौरिया और शंभू कुशवाह के लिए बारिश के दिनों में स्कूल पहुंचना किसी चुनौतीपूर्ण अभियान से कम नहीं है।बताया जा रहा है कि हर सुबह शिक्षक नदी किनारे पहुंचकर ग्रामीणों का इंतजार करते हैं। ग्रामीण हवा भरे ट्यूब लेकर नदी पार करते हैं और इसके बाद शिक्षक उसी ट्यूब के सहारे उफनती नदी को पार कर स्कूल पहुंचते हैं।नदी का बहाव तेज होने और जलस्तर बढ़ने के बावजूद यह जोखिम भरा सफर रोज दोहराया जा रहा है। शाम को स्कूल की छुट्टी के बाद शिक्षकों को वापस लौटने के लिए फिर उसी तरह नदी पार करनी पड़ती है।
न पुल, न सुरक्षित रास्ता, फिर भी स्कूल पहुंचने का दबाव
ग्रामीणों का कहना है कि नदरौली गांव तक पहुंचने के लिए बारिश के मौसम में सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था नहीं है। बेसली नदी में पानी बढ़ते ही गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है।इसके बावजूद शिक्षकों के सामने स्कूल पहुंचने और समय पर उपस्थिति दर्ज कराने की चुनौती बनी रहती है। सवाल यह है कि जब किसी स्थान तक पहुंचने का सुरक्षित रास्ता ही उपलब्ध नहीं है, तो केवल डिजिटल उपस्थिति के आधार पर शिक्षकों की जिम्मेदारी और अनुपस्थिति तय करना कितना व्यावहारिक है।
ई-अटेंडेंस नहीं लगी तो कार्रवाई का डर
शिक्षकों के अनुसार, ई-अटेंडेंस व्यवस्था में निर्धारित समय और स्थान पर उपस्थिति दर्ज कराना जरूरी है। ऐसे में यदि नदी का जलस्तर बढ़ने या रास्ता बंद होने के कारण शिक्षक स्कूल नहीं पहुंच पाते, तो उन्हें अनुपस्थित दर्ज किए जाने या अन्य विभागीय कार्रवाई का डर रहता है।शिक्षकों का कहना है कि एक तरफ उफनती नदी और जान का खतरा है, जबकि दूसरी तरफ समय पर स्कूल पहुंचने और ई-अटेंडेंस दर्ज कराने का प्रशासनिक दबाव। ऐसे में बारिश के चार महीनों के दौरान विशेष परिस्थितियों को देखते हुए राहत या वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की जा रही है।
ई-अटेंडेंस की ज़िद या ज़िंदगी से खिलवाड़? भिंड में उफनती नदी और हवा भरे ट्यूब के सहारे स्कूल पहुंच रहे शिक्षक#BhindNews #EAttendance #TeacherSafety #FloodedRiver #SchoolEducation #MadhyaPradeshNews pic.twitter.com/ha1NGCVqFn
— Nishaanebaz.com (@nishaanebaz_com) August 23, 2026
दूसरे गांवों के शिक्षकों के सामने भी वही संकट
बताया जा रहा है कि यह समस्या केवल नदरौली गांव तक सीमित नहीं है। क्षेत्र के सुमेर सिंह का पूरा सहित अन्य इलाकों में भी बारिश के दौरान शिक्षकों को आवागमन में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।शिक्षक संतोष गोयल और अशोक बघेल सहित अन्य शिक्षकों के सामने भी नदी और खराब रास्तों के कारण स्कूल पहुंचने की चुनौती बताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से सुरक्षित पहुंच मार्ग की मांग की जा रही है, लेकिन बारिश के मौसम में समस्या और गंभीर हो जाती है।
बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा असर
इस समस्या का असर सिर्फ शिक्षकों तक सीमित नहीं है। बबेड़ी पंचायत के पराय का पूरा सहित नदी के दूसरी ओर रहने वाले कई बच्चों के लिए भी स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है।बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से बच्चे सुरक्षित तरीके से नदरौली मिडिल स्कूल तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में कई दिनों तक उनकी पढ़ाई प्रभावित होने की स्थिति बन जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश के चार महीनों में यही समस्या सामने आती है। उनकी मांग है कि या तो नदी पर पुल और सुरक्षित पहुंच मार्ग बनाया जाए या फिर नदी के इस पार ही स्कूल की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
क्या किसी बड़े हादसे के बाद जागेगी व्यवस्था?
हवा भरे ट्यूब के सहारे तेज बहाव वाली नदी पार कर स्कूल पहुंचते शिक्षकों की तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। आखिर क्या डिजिटल उपस्थिति की अनिवार्यता के साथ स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और सुरक्षा जोखिमों को भी ध्यान में रखा जा रहा है?ग्रामीणों और शिक्षकों की मांग है कि बारिश के दौरान सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और ई-अटेंडेंस को लेकर विशेष परिस्थितियों में राहत दी जाए। साथ ही लंबे समय से चली आ रही समस्या के स्थायी समाधान के लिए बेसली नदी पर पुल या सुरक्षित पहुंच मार्ग बनाने की दिशा में कार्रवाई की जाए।फिलहाल भिंड के इस गांव में हर दिन उफनती नदी पार कर स्कूल पहुंचना केवल नौकरी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जिंदगी और व्यवस्था के बीच एक जोखिम भरी जंग बन गया है।





