बैतूल। Nishaanebaz.com-Betul Forest Department Scam: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में पश्चिम वन मंडल की गवासेन रेंज से वन विभाग में भ्रष्टाचार और आदिवासियों के शोषण का एक सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि यहां पदस्थ डिप्टी रेंजर बाथम पिछले कई सालों से गरीब चौकीदारों के हक पर खुलेआम डाका डाल रहे हैं। स्थानीय आदिवासी चौकीदारों से महीने के पूरे 30 दिन ड्यूटी करवाई जाती है, लेकिन जब वेतन देने की बारी आती है तो उन्हें महज 15 दिनों का वेतन (लगभग 6 हजार रुपये) ही थमाया जा रहा है।
15 दिनों का वेतन कहां हो रहा गायब
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बाकी के 15 दिनों का मेहनताना किसकी जेब में जा रहा है? सूत्रों के अनुसार, गवासेन रेंज में यह फर्जीवाड़ा और गबन का गोरखधंधा लंबे समय से बदस्तूर जारी है। पीड़ित चौकीदार जब भी अपने पूरे वेतन की मांग करते हैं, तो उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी देकर चुप करा दिया जाता है। सालों से चल रहे इस शोषण के खिलाफ अब एक पीड़ित चौकीदार ने कैमरे के सामने आकर अपनी आपबीती सुनाई है।
बैतूल के गवासेन रेंज में वेतन गड़बड़ी के आरोप, 30 दिन काम के बदले 15 दिन की मजदूरी देने का दावा।
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— Nishaanebaz.com (@nishaanebaz_com) October 21, 2026
डीएफओ की शह का आरोप, कार्रवाई से बच रहे चहेते अफसर
स्थानीय ग्रामीणों और वन विभाग के निचले कर्मचारियों का स्पष्ट आरोप है कि डिप्टी रेंजर बाथम गवासेन रेंज में वर्षों से जमे हुए हैं क्योंकि उन्हें पश्चिम वन मंडल के डीएफओ (DFO) का संरक्षण प्राप्त है। डीएफओ के चहेते होने के कारण कई शिकायतें सामने आने के बावजूद उन पर अब तक कोई कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। इस लचर रवैये को लेकर विभागीय कर्मचारियों और क्षेत्र के आदिवासियों में भारी रोष व्याप्त है।
उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की उठी मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब वन विभाग के आला अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने की मांग तेज हो गई है। इस संबंध में एसडीओ (SDO) कन्हैया कुमार का कहना है कि मामले की पड़ताल की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। वहीं, प्रताड़ित चौकीदार छोटेलाल और उनके साथियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि डिप्टी रेंजर बाथम और इस फर्जीवाड़े में शामिल सभी दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए तथा उनका रुका हुआ वेतन तुरंत दिलाया जाए।