Sunday, September 27, 2026
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Land Encroachment Jashpur : सरकारी जमीन पर रसूख का ‘बुलडोजर’: बालाझर के बच्चों से छिना जा रहा खेल का हक, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

Land Encroachment Jashpur : गौरी शंकर गुप्ता/पत्थलगांव : जशपुर जिले के पत्थलगांव तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बालाझर में इन दिनों भारी तनाव का माहौल है। आरोप है कि यहाँ के शासकीय खेल मैदान, जहाँ कभी गांव के बच्चे अपना भविष्य गढ़ते थे, उसे कुछ रसूखदार लोग अपनी निजी जागीर समझकर हड़प रहे हैं। ग्रामीणों की चीख-पुकार के बावजूद राजस्व अमले की रहस्यमयी खामोशी कई बड़े सवाल खड़े कर रही है।

इन रसूखदारों पर लगा गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने नामजद शिकायत करते हुए बंशीधर यादव, भगत राम यादव और अनंत शर्मा पर अवैध कब्जे का सीधा आरोप जड़ा है। आरोप है कि शासकीय भूमि पर दिन-दहाड़े निर्माण कार्य की ईंटें रखी जा रही हैं। खेल मैदान की जमीन का जिस तरह से बंदरबांट किया जा रहा है, उसने प्रशासन के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।

फाइलों में कैद इंसाफ, धरातल पर निर्माण

हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों के पास प्रशासन की सील लगी शिकायतों का पुलिंदा है। तारीख दर तारीख आवेदन दिए गए, लेकिन नतीजा ‘सिफर’ रहा। ग्रामीण अब यह पूछने को मजबूर हैं कि क्या इन अतिक्रमणकारियों की पहुंच तहसील कार्यालय के अधिकारियों की कलम से भी ज्यादा मजबूत है?

आक्रोशित युवा: ‘मैदान नहीं तो चैन नहीं’

बालाझर के युवाओं और खिलाड़ियों में भारी रोष है। उनका कहना है कि यह मैदान केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनकी भावनाओं और पसीने से सींचा गया स्थान है। ग्रामीणों ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • तत्काल सीमांकन: खेल मैदान की सरकारी जमीन का तुरंत सीमांकन किया जाए।
  • अवैध निर्माण का विध्वंस: मैदान पर खड़ी की गई अवैध ईंटों और दीवारों को जमींदोज किया जाए।
  • कठोर कार्रवाई: भू-माफियाओं और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए।

मुख्यमंत्री से ‘कड़वा सवाल’

ग्रामीणों ने सीधे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सवाल किया है कि एक तरफ सरकार खिलाड़ियों को ओलंपिक और राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर उनके मैदानों पर माफियाओं का कब्जा है। क्या बालाझर के बच्चों को उनका हक वापस मिलेगा?

आगे की रणनीति

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ‘मौन व्रत’ नहीं तोड़ा गया और अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो वे कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे और उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।

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