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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया बस्तर पंडुम का शुभारंभ, बोलीं- जय जोहार! यहां संस्कृति की भव्यता है

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 जगदलपुर : छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम का औपचारिक शुभारंभ किया। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने पारंपरिक अंदाज में ‘जय जोहार’ कहकर की और बस्तर की धरती से गहरा भावनात्मक संबंध व्यक्त किया। राष्ट्रपति ने कहा कि यहां आकर उन्हें अपने घर जैसा अनुभव होता है और हजारों बच्चों द्वारा किए गए स्वागत ने उन्हें अत्यंत भावुक कर दिया।

आदिवासी संस्कृति और परंपरा की भव्यता की सराहना

राष्ट्रपति मुर्मू ने बस्तर की लोक कला, संस्कृति, व्यंजन और परंपराओं को भारत की समृद्ध धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है जहां आदिवासी संस्कृति की भव्यता स्पष्ट दिखाई देती है और लोग मिलकर उत्सव मनाने की परंपरा को जीवित रखते हैं।उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बस्तर की गुफाएं, जलप्रपात और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटन की अपार संभावनाएं रखते हैं तथा होम-स्टे जैसे मॉडल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं।

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माओवाद से शांति की ओर बढ़ता बस्तर

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि दशकों तक माओवाद से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में अब विश्वास और शांति लौट रही है। बड़ी संख्या में उग्रवादियों के सरेंडर करने को उन्होंने सकारात्मक संकेत बताया और मुख्यधारा में लौटने वालों का स्वागत किया।उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे भटकाने वाली शक्तियों से दूर रहकर लोकतांत्रिक व्यवस्था और शिक्षा के रास्ते पर आगे बढ़ें।

शिक्षा, विकास योजनाएं और युवाओं के लिए संदेश

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन की आधारशिला है और जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों के लिए एकलव्य विद्यालय जैसी पहलें इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर युवाओं से आत्मनिर्भर और सशक्त भविष्य बनाने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बस्तर दौरा केवल एक सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह शांति, विकास और आदिवासी अस्मिता के सम्मान का संदेश भी लेकर आया। उनका संबोधन बस्तर के बदलते स्वरूप और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद को मजबूत करता है।

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