भोपाल: राजधानी के जेपी अस्पताल जिला चिकित्सालय में मरीज को फफूंद लगी दवा दिए जाने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। शुक्रवार शाम एक मरीज पैर में चोट और फ्रैक्चर की आशंका के चलते अस्पताल की ओपीडी में हड्डी रोग विशेषज्ञ को दिखाने पहुंचा था। डॉक्टर ने जांच के बाद एक्स-रे कराने और दर्द की दवा लेने की सलाह दी।
फार्मेसी से मिली संदिग्ध दवा
मरीज ने अस्पताल परिसर स्थित सरकारी फार्मेसी से दवा प्राप्त की, लेकिन जब उसने दवा को ध्यान से देखा तो उसमें फफूंद जमी हुई थी। यह दवा दर्द निवारक डिक्लोफिनेक 50 एमजी बताई जा रही है, जिस पर एक्सपायरी डेट जून 2027 अंकित थी।

मरीज ने CMHO को भेजी शिकायत
मरीज ने इस गंभीर लापरवाही की शिकायत ईमेल के माध्यम से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉक्टर मनीष शर्मा को की। मरीज का आरोप है कि यदि वह जल्दबाजी में दवा खा लेता, तो उसकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ सकती थी।
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सीनियर डॉक्टर की गैरमौजूदगी पर सवाल
बताया गया कि उस समय ओपीडी में कोई सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं था और इंटर्न डॉक्टर ने ही मरीज की जांच कर दवा लिखी थी। इससे अस्पताल की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
CMHO का स्पष्टीकरण
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए CMHO डॉक्टर मनीष शर्मा ने स्पष्ट किया कि जिस फफूंद लगी दवा को लेकर शिकायत की गई है, वह अस्पताल के स्टॉक में उपलब्ध ही नहीं थी। उन्होंने बताया कि डिक्लोफिनेक 50 एमजी का स्टॉक 10 दिसंबर को ही समाप्त हो चुका था, इसलिए उस दवा का अस्पताल से वितरण संभव नहीं है।
सप्लाई एजेंसी पर उठे सवाल
दवाओं की आपूर्ति और गुणवत्ता की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश स्वास्थ्य लोक निगम लिमिटेड की है। इस घटना ने सरकारी दवाओं की सप्लाई चेन और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।













