Jashpur Paddy Scam 2026 : पत्थलगांव (गौरीशंकर गुप्ता)। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के चावल में बड़े गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पत्थलगांव क्षेत्र के जोराडोल स्थित द्वारिका राइस मिल के संचालक अनिल जिंदल पर लगभग 4 करोड़ रुपये मूल्य का सरकारी चावल खुर्द-बुर्द करने का आरोप लगा है। इस खुलासे के बाद कलेक्टर के निर्देश पर मिल को सील कर दिया गया है और आरोपी मिलर के खिलाफ धोखाधड़ी सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
कागजों में हुई मिलिंग, गोदाम से गायब मिला चावल
जांच में सामने आया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान द्वारिका राइस मिल को 25,000 क्विंटल धान आवंटित किया गया था। नियमानुसार मिलिंग के बाद चावल सरकारी गोदामों में जमा होना था, लेकिन भौतिक सत्यापन में भारी विसंगति पाई गई:
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लाखों का गबन: रिकॉर्ड के अनुसार केवल 15,000 क्विंटल चावल ही जमा हुआ, जबकि शेष 13,000 क्विंटल चावल (बाजार मूल्य लगभग 4 करोड़ रुपये) गायब मिला।
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फर्जीवाड़ा: आरोप है कि मिल संचालक ने फर्जी बिल और वाहनों के झूठे दस्तावेज तैयार कर सरकारी चावल को खुले बाजार में बेच दिया।
बिजली कटी थी, फिर भी चलता रहा टर्नओवर
जांच टीम तब हैरान रह गई जब पता चला कि मिल की बिजली कटी होने के बावजूद कागजों पर भारी-भरकम टर्नओवर और मिलिंग दिखाई जा रही थी। इस ‘जादुई मिलिंग’ ने विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली और मिलीभगत पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला खाद्य अधिकारी द्वारा किए गए सत्यापन में धान और बारदानों की भी भारी कमी पाई गई है, जिससे हजारों गरीब परिवारों का राशन प्रभावित हुआ है।
कलेक्टर की सख्त कार्रवाई, आरोपी फरार
घोटाला उजागर होने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है:
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FIR और निलंबन: अनिल जिंदल के खिलाफ धारा 420, 467 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही विभाग के दो सहायक कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।
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पुलिस की तलाश: जशपुर एसपी के अनुसार, मुख्य आरोपी अनिल जिंदल फिलहाल फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
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विपक्ष का हमला: इस मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गर्मा गई है। विपक्ष ने सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पूरे पीडीएस सिस्टम के ऑडिट की मांग की है।
सिस्टम की खुली पोल
जशपुर जिले में धान और चावल के गबन का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जनवरी में भी कोनपारा केंद्र पर 6.55 करोड़ का घोटाला सामने आया था। स्थानीय किसानों का कहना है कि उन्होंने मेहनत से धान बेचा, लेकिन गरीबों के हक का चावल बिचौलियों और मिलरों की भेंट चढ़ गया। प्रशासन ने अब क्षेत्र की अन्य 5 संदिग्ध मिलों का भी ऑडिट शुरू कर दिया है।











