रोहित वर्मा/खरोरा। तिल्दा विकासखंड के ग्राम भड़हा में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सुप्रसिद्ध जराही-बराही माता मंदिर परिसर में विशाल मड़ई मेले का आयोजन किया गया। यह मेला न केवल मनोरंजन का साधन रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ की अटूट आस्था और लोक-संस्कृति के संगम के रूप में भी उभरा।
मंदिर की अनूठी मान्यता: इच्छाधारी नाग-नागिन का वास: भड़हा के इस मंदिर की ख्याति यहाँ स्थित ‘भिभौरा’ (सर्प निवास स्थल) के कारण दूर-दराज तक फैली हुई है। ग्रामीणों की गहरी मान्यता है कि यहाँ इच्छाधारी नाग-नागिन का वास है। मंदिर के पास स्थित एक पवित्र वृक्ष की लकड़ी को कोई नहीं जलाता और न ही मंदिर क्षेत्र में कोई अनुचित कार्य करने का साहस करता है। आश्चर्य की बात यह है कि गाँव में जहाँ भी सर्प निकलता है, उसे सुरक्षित इसी मंदिर के पास छोड़ा जाता है और आज तक यहाँ के सर्पों ने किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन: मड़ई मेले में यादव समाज के भाइयों द्वारा कर्मा, ददरिया और सुवा जैसे पारंपरिक लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति दी गई। इन प्रस्तुतियों ने छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति की जीवंत झलक पेश की, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण एकत्रित हुए।
वरिष्ठजनों ने साझा की गौरवशाली परंपरा: पुजारी सुखदेव शर्मा द्वारा नियमित पूजा-अर्चना के बाद मेले का आनंद श्रद्धालुओं ने लिया। ग्राम के वरिष्ठ नागरिक रामनारायण चंद्राकर, गुलजारी लाल, शत्रुघ्न लाल और फेकू साहू ने बताया कि भिभौरा की पूजा की परंपरा सदियों पुरानी है और मड़ई मेला इस परंपरा को जीवंत रखने का एक सशक्त माध्यम है। कार्यक्रम में सरपंच सहित ग्राम पंचायत भड़हा के पंचगण और समस्त ग्रामीण उपस्थित रहे।











