Friday, September 4, 2026
Home Lifestyle Janmashtami Vrat Parana 2026: रात 12 बजे व्रत खोलें या अगले दिन?...

Janmashtami Vrat Parana 2026: रात 12 बजे व्रत खोलें या अगले दिन? जानिए सही समय

Janmashtami Vrat Parana 2026: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- देशभर में आज यानी 4 सितंबर 2026 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों से लेकर घरों तक भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां की गई हैं। भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

जन्माष्टमी के दिन पूजा के साथ सबसे ज्यादा चर्चा Janmashtami Vrat Parana 2026 को लेकर होती है। आखिर व्रत कब खोला जाए? क्या आधी रात को कृष्ण जन्म के बाद प्रसाद लेकर व्रत समाप्त किया जा सकता है या फिर अगले दिन सुबह तक इंतजार करना चाहिए? इसको लेकर अलग-अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं।

कृष्ण जन्म के बाद ही क्यों बढ़ जाता है इंतजार?
जन्माष्टमी की रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय विशेष माना जाता है। इस समय भक्त लड्डू गोपाल का अभिषेक करते हैं, उनका श्रृंगार करते हैं और भोग लगाकर आरती करते हैं।हालांकि, जन्माष्टमी व्रत पारण 2026 का तरीका हर परिवार और परंपरा में एक जैसा नहीं है। कुछ भक्त कृष्ण जन्म और पूजा के बाद चरणामृत या प्रसाद लेकर व्रत खोल लेते हैं। वहीं कई लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करते हैं।

व्रत रखने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले भक्त अपनी क्षमता के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं। फलाहार में आमतौर पर फल, दूध, दही, मखाना और सेंधा नमक जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान अनाज और दाल का सेवन नहीं किया जाता।व्रत की तैयारी कई घरों में एक दिन पहले से शुरू हो जाती है। सात्विक भोजन करने और लहसुन-प्याज जैसी चीजों से दूरी रखने की परंपरा है। व्रत वाले दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने के बाद भगवान कृष्ण का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है।
Read More: CG Janmashtami Dry Day: छत्तीसगढ़ में जन्माष्टमी पर ‘नो नॉन-वेज डे’ घोषित, पशुवध गृह व शराब दुकानें रहेंगी बंद

रात 12 बजे कृष्ण जन्म के बाद क्या करें?
Janmashtami Vrat Parana 2026 के दौरान मध्यरात्रि की पूजा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। रात 12 बजे भगवान कृष्ण के जन्म के बाद लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक किया जाता है।इसके बाद भगवान का श्रृंगार कर पूजा और आरती की जाती है। माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और अन्य सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भक्त भगवान के जन्म की खुशी में भजन-कीर्तन भी करते हैं।

अगर रात में व्रत खोल रहे हैं तो क्या खाएं?
जो लोग रात 12 बजे पूजा के बाद व्रत खोलने की परंपरा मानते हैं, उन्हें सबसे पहले भगवान को प्रणाम करके प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। चरणामृत या पंचामृत से व्रत खोलने के बाद पंजीरी और फल लिया जा सकता है।जन्माष्टमी व्रत पारण 2026 में लंबे समय तक उपवास के बाद अचानक बहुत ज्यादा भोजन करने से बचना बेहतर माना जाता है। हल्का और सात्विक भोजन लेकर धीरे-धीरे सामान्य खान-पान की ओर लौटना उचित रहता है।

5 सितंबर को कितने बजे होगा व्रत का पारण?
जो भक्त जन्माष्टमी का व्रत अगले दिन तक रखते हैं, उनके लिए इस बार 5 सितंबर 2026 को सुबह 06:08 बजे के बाद पारण का समय बताया गया है। दी गई जानकारी के अनुसार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र की समाप्ति के बाद व्रत खोलना शुभ माना जाता है।इसलिए जिन परिवारों में अगले दिन पारण की परंपरा है, वे स्थानीय पंचांग और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार समय का ध्यान रख सकते हैं।

निर्जला व्रत वालों को क्यों रखनी चाहिए सावधानी?
निर्जला व्रत में पूरे दिन पानी और भोजन नहीं लिया जाता है। ऐसे में व्रत खोलते समय शरीर पर अचानक ज्यादा भोजन का दबाव डालना ठीक नहीं माना जाता।पारण की शुरुआत पानी, चरणामृत, दूध, फल या हल्के भोजन से की जा सकती है। यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो या लंबे समय तक उपवास रखना कठिन हो, तो अपनी सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है।

जन्माष्टमी की रात जागरण का भी है महत्व
भगवान कृष्ण के जन्म तक जागरण करने की परंपरा भी कई जगहों पर निभाई जाती है। भक्त रात में भजन-कीर्तन करते हैं और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का स्मरण करते हैं।मध्यरात्रि में कृष्ण जन्म के बाद पूजा, अभिषेक और आरती की जाती है। इसके बाद कुछ भक्त प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलते हैं, जबकि कुछ लोग अगले दिन सुबह पारण करते हैं।

इस तरह Janmashtami Vrat Parana 2026 का समय परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है। रात में व्रत खोलने वाले कृष्ण जन्म और पूजा के बाद प्रसाद ले सकते हैं, जबकि अगले दिन पारण करने वाले भक्त 5 सितंबर 2026 को सुबह 06:08 बजे के बाद व्रत खोलने का समय मान सकते हैं। स्थानीय पंचांग और अपनी पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here