Indore Water Tragedy : भागीरथपुरा (इंदौर)। दूषित पानी पीने से 8 लोगों की मौत के बाद बुधवार को भागीरथपुरा क्षेत्र अखाड़े में तब्दील हो गया। शासकीय डिस्पेंसरी के निरीक्षण पर पहुंचे नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव को उस समय कड़े विरोध का सामना करना पड़ा, जब महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी सेतिया अपने कार्यकर्ताओं के साथ भीतर घुस गईं। नारेबाजी और हंगामे के बीच महापौर भार्गव डिस्पेंसरी के अंदर ही फंस गए, जिन्हें बाद में पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं ने सुरक्षित बाहर निकाला।
कांग्रेस का आरोप: 11 शिकायतों को किया गया अनसुना रीना बोरासी सेतिया ने सरकार पर ‘प्रशासनिक अपराध’ का आरोप लगाते हुए कहा कि 6 महीने पहले टेंडर पास होने के बावजूद फाइल को आगे नहीं बढ़ाया गया। नागरिकों ने 11 बार दूषित पानी की शिकायत की, लेकिन प्रशासन सोता रहा। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज करने और पीड़ित परिवारों को मुआवजे की मांग की।
सरकार का पक्ष: स्थिति नियंत्रण में, अफवाहों से बचें वहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि हालात अब पूरी तरह नियंत्रण में हैं। उन्होंने तर्क दिया कि कई बार वातावरण और मौसम के कारण भी तबीयत बिगड़ती है। प्रशासन ने 100 बेड तैयार रखे हैं और अस्पतालों में मरीजों की संख्या घट रही है। उन्होंने कांग्रेस के प्रदर्शन को काम में बाधा बताया।
मौतों के आंकड़ों पर उलझा प्रशासन: महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि अब तक 116 लोग बीमार हुए हैं, जिनमें से 36 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। हालांकि, मौतों के आंकड़ों पर विरोधाभास दिखा; जहां विभाग 3 मौतें बता रहा है, वहीं महापौर ने खुद 7 लोगों की मौत की जानकारी होने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता इलाज है, लेकिन लापरवाही की जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।













