इंदौर : इंदौर शहर में संगठित वाहन ठगी गिरोह का खुला खेल सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि इस ठगी का शिकार कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि भाजपा युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष बने हैं। स्कॉर्पियो N कार बेचने के नाम पर उनसे 7.30 लाख रुपये की ठगी की गई, लेकिन डिजिटल सबूत, सीसीटीवी फुटेज और आरोपी का कबूलनामा होने के बावजूद अब तक कोई ठोस पुलिस कार्रवाई नहीं हुई है।
स्कॉर्पियो N के नाम पर रचा गया ठगी का जाल
पीड़ित नेता को एक फर्जी ब्रोकर के जरिए स्कॉर्पियो N बेचने का प्रस्ताव दिया गया। सौदा तय होने के बाद पूरी रकम ट्रांसफर कर दी गई, लेकिन बाद में सामने आया कि वाहन किसी और व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड है। दस्तावेजों की जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई।
CCTV और डिजिटल सबूत भी बेअसर
ठगी के बाद आरोपी द्वारा कर चोरी और वाहन लेन-देन से जुड़े CCTV फुटेज भी सामने आए। इसके बावजूद पुलिस ने न तो गिरोह के अन्य सदस्यों पर शिकंजा कसा और न ही पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की।
Read More : M.P News : भोपाल में SIR का पहला चरण पूरा, 4.38 लाख मतदाता सूची से बाहर, 35 हजार मृत मतदाताओं के हटेंगे नाम
आरोपी ने कबूल किया, फिर भी रिहा
मामले में एक आरोपी को पुलिस ने पकड़ा, जिसने पूछताछ में ठगी की बात कबूल भी की, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ ही देर की पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया। इससे पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
6 FIR के लिए भटकता रहा पीड़ित
पीड़ित का आरोप है कि उसे 6 एफआईआर दर्ज कराने के लिए अलग-अलग थानों के चक्कर लगाने पड़े। हर स्तर पर जिम्मेदारी से बचने का रवैया अपनाया गया, जिससे पीड़ित को न्याय नहीं मिल सका।
लगातार वारदातें, गिरोह के हौसले बुलंद
शहर में वाहन ठगी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन पुलिस की निष्क्रियता के चलते गिरोह के हौसले बुलंद हैं। सवाल यह है कि जब एक राजनीतिक पदाधिकारी को न्याय नहीं मिल पा रहा, तो आम नागरिक की सुरक्षा कितनी सुनिश्चित है?













