इंदौर: इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। प्रशासन ने अब तक 18 मौतों की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। इस मामले ने शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
18 पीड़ित परिवारों को मुआवजे की घोषणा
जिला प्रशासन के अनुसार, दूषित पानी से जान गंवाने वाले 18 पीड़ितों के परिजनों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। इनमें से 15 परिवारों को मुआवजे की राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर कर दी गई है, जबकि शेष 3 परिवारों के बैंक खाते खुलवाकर RTGS के माध्यम से राशि भेजी जाएगी।
कलेक्टर शिवम वर्मा का बयान
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि, “मीडिया रिपोर्ट्स और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर जिन-जिन पीड़ितों के नाम सामने आए हैं, सभी परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। सरकार के इस संबंध में सख्त निर्देश हैं।”

मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर हो रही पुष्टि
कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि मौतों की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर की जा रही है। जिन मामलों की रिपोर्ट आ चुकी है, उन्हें सूची में शामिल किया गया है, जबकि कुछ और मेडिकल रिपोर्ट अभी आना बाकी हैं, जिनके बाद आंकड़ा बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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जल आपूर्ति व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने इंदौर की जल आपूर्ति प्रणाली, पाइपलाइन में लीकेज, जल शुद्धिकरण और समय-समय पर की जाने वाली जांच की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे हालात इतने भयावह हो गए।
प्रशासनिक जवाबदेही की मांग
हालांकि प्रशासन मुआवजे की प्रक्रिया पूरी करने का दावा कर रहा है, लेकिन सवाल यह है कि दोषियों पर कार्रवाई कब होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे। जनता अब केवल मुआवजा नहीं, बल्कि जवाबदेही और स्थायी समाधान चाहती है।













