नई दिल्ली: इंडिगो एयरलाइंस का ऑपरेशन संकट शुक्रवार को भी जारी रहा और यात्रियों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रहीं। लगातार चौथे दिन उड़ानें रद्द होने के बाद आज भी हालात सामान्य नहीं हो सके। शुक्रवार को 1000 उड़ानें रद्द हुईं, जबकि आज भी इंडिगो ने 452 उड़ानें रद्द करने का ऐलान किया है।
कंपनी के CEO पीटर एल्बर्स ने स्थिति पर खेद जताते हुए कहा कि 10 से 15 दिसंबर के बीच हालात सामान्य होने की उम्मीद है। उन्होंने माना कि ऑपरेशनल दिक्कतें अभी भी जारी हैं, लेकिन सुधार धीरे-धीरे हो रहा है।
स्पाइसजेट की एंट्री: 100 अतिरिक्त उड़ानों का ऐलान
इंडिगो संकट के बीच यात्रियों को राहत देने के लिए स्पाइसजेट ने बड़ी घोषणा की है। कंपनी ने कहा है कि वह 100 अतिरिक्त उड़ानें संचालित करेगी ताकि यात्रियों को वैकल्पिक विकल्प मिल सके।हालांकि मांग बढ़ने के कारण फ्लाइट किराए में रिकॉर्ड उछाल देखने को मिल रहा है, कुछ रूट्स पर किराया सामान्य से तीन गुना तक पहुँच गया है।
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सरकार की हाई-लेवल जांच, 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय
नागर विमानन मंत्रालय ने इंडिगो संकट पर हाई-लेवल इनक्वायरी के आदेश दिए हैं।
सरकार ने फ्लाइट ऑपरेशन, किराया, देरी, और रद्द उड़ानों की स्थिति पर नज़र रखने के लिए 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है।
रेलवे ने भी संभाली कमान: स्पेशल ट्रेनें और अतिरिक्त कोच
हजारों यात्रियों के अचानक ट्रेन की ओर रुख करने के बाद भारतीय रेलवे ने
स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है।
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इसके तहत—
- 37 ट्रेनों में 116 अतिरिक्त कोच लगाए जा रहे हैं
- लंबी दूरी की ट्रेनों में टिकट की मांग कई गुना बढ़ गई
- 700 से 1000 किलोमीटर यात्रा करने वाले यात्री बड़ी संख्या में रिज़र्वेशन करा रहे हैं
दिल्ली से कोलकाता, जयपुर, अहमदाबाद, मुंबई, जम्मू, श्रीनगर, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई जाने वाली ट्रेनों में सीटें लगभग फुल हो चुकी हैं।
कहाँ-कहाँ उड़ानें सबसे ज़्यादा रद्द हुईं?
- दिल्ली: 86 उड़ानें रद्द (37 प्रस्थान, 49 आगमन)
- मुंबई: 109 उड़ानें रद्द (51 आगमन, 58 प्रस्थान)
- अहमदाबाद: 19 उड़ानें रद्द
- तिरुवनंतपुरम: 6 उड़ानें रद्द
देश के लगभग सभी बड़े एयरपोर्ट इंडिगो संकट से बुरी तरह प्रभावित हैं।
सरकारी सिस्टम की नाकामी भी उजागर
विशेषज्ञों के मुताबिक यह संकट सिर्फ एक एयरलाइन का ऑपरेशनल फेलियर नहीं,
बल्कि भारत के एविएशन सिस्टम की संरचनात्मक कमजोरी का भी संकेत है—
- मॉनिटरिंग सिस्टम समय पर चेतावनी नहीं दे सका
- DGCA द्वारा समय से हस्तक्षेप न होना
- आपातकालीन विकल्पों की कमी
- एक एयरलाइन पर अत्यधिक निर्भरता













