भारतीय शेयर बाजार में भूचाल: सेंसेक्स 1100 अंक टूटा, निफ्टी 25,400 के करीब, दलाल स्ट्रीट में मची भगदड़

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक संकेतों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए नए टैरिफ के प्रभाव से निवेशकों में घबराहट का माहौल दिखा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक टूट गए, जिससे दलाल स्ट्रीट पर भारी बिकवाली देखने को मिली।

सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट

दोपहर 1 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 1,119.80 अंक यानी 1.34% गिरकर 82,174.86 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 भी 311.70 अंक यानी 1.2% की गिरावट के साथ 25,400.90 के स्तर पर पहुंच गया।

इस गिरावट के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 3.23 ट्रिलियन रुपये घटकर 465.31 ट्रिलियन रुपये रह गया।

ट्रंप के टैरिफ का असर

अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा 10% वैश्विक लेवी लागू करने और इसे 15% तक बढ़ाने की चेतावनी ने वैश्विक बाजारों को झकझोर दिया है। हालांकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ टैरिफ को अवैध बताया है, लेकिन व्यापार समझौतों से पीछे हटने की आशंका ने अनिश्चितता बढ़ा दी है।इसका सीधा असर निर्यात आधारित भारतीय कंपनियों पर पड़ा है, खासकर IT सेक्टर पर।

IT सेक्टर में सबसे ज्यादा मार

निफ्टी IT इंडेक्स में 5% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। टेक महिंद्रा के शेयर लगभग 7% तक टूट गए, जबकि इन्फोसिस, टीसीएस और एचसीएल टेक में भी तेज बिकवाली रही।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका में AI आधारित व्यापार निगरानी और संभावित नीति बदलावों ने टेक कंपनियों पर दबाव बढ़ा दिया है।

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कौन से शेयर गिरे और कौन संभले?

रियल्टी और केमिकल सेक्टर के शेयर लाल निशान में रहे। भारती एयरटेल भी गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रही।

वहीं निफ्टी फार्मा इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली। सन फार्मा, एचयूएल, एनटीपीसी और पावर ग्रिड जैसे कुछ शेयरों ने गिरावट के बीच मामूली बढ़त दर्ज की।

मिडकैप और स्मॉलकैप पर भी दबाव

व्यापक बाजार भी गिरावट से अछूता नहीं रहा। बीएसई मिडकैप 100 और स्मॉलकैप इंडेक्स दोनों में 1% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि, ब्रह्मपुत्र इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरों ने 5% का अपर सर्किट लगाकर 167 रुपये का स्तर छुआ। वहीं जनवरी के रिटेल पेमेंट डेटा में 0.36% की गिरावट ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

कुल मिलाकर, Indian Stock Market Crash का मुख्य कारण वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिकी टैरिफ नीति रही। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक व्यापार पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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