निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : भारत की ऊर्जा जरूरतों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा बदलाव संकेतों में दिखाई दे रहा है। अमेरिका ने यह इशारा दिया है कि भारत को जल्द ही वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की सीमित अनुमति मिल सकती है। यदि ऐसा होता है तो भारत को सस्ता और भारी क्रूड ऑयल मिल सकता है, जिससे रिफाइनिंग मार्जिन और ऊर्जा सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी।
हालांकि, यह छूट पूरी तरह स्वतंत्र नहीं होगी। अमेरिकी प्रशासन इस पूरे आयात पर नियंत्रण बनाए रखेगा और आयात की मात्रा भी सीमित रह सकती है। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है, जब अमेरिका भारत पर रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करने का दबाव लगातार बना रहा है।
अमेरिकी नियंत्रण में होगा वेनेजुएला का तेल
अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस्टोफर राइट ने एक इंटरव्यू में साफ किया कि वेनेजुएला के तेल की बिक्री अब अमेरिकी निगरानी में होगी। तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचा जाएगा, लेकिन उसकी बिक्री से मिलने वाली राशि सीधे वाशिंगटन के खाते में जमा होगी।
उनका कहना था कि वेनेजुएला के पास दो ही विकल्प हैं—या तो अमेरिका के साथ मिलकर तेल बेचे, या फिर तेल बिल्कुल न बेचे। यह बयान बताता है कि अमेरिका वेनेजुएला के ऊर्जा संसाधनों पर किस हद तक नियंत्रण चाहता है।
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भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है। वर्ष 2019 से पहले भारत वेनेजुएला के तेल का सबसे बड़ा खरीदार था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते आयात रोकना पड़ा। अब यदि अमेरिका की सहमति मिलती है तो भारत को रूस के विकल्प के रूप में वेनेजुएला का सस्ता तेल मिल सकता है।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह तेल रूसी कच्चे तेल की तुलना में भी सस्ता हो सकता है, जिससे भारत को आर्थिक लाभ मिलेगा और ऊर्जा आपूर्ति का जोखिम भी कम होगा।
भूराजनीति और ऊर्जा का नया समीकरण
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है। अमेरिका रूस के प्रभाव को सीमित करना चाहता है और भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देशों को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत देना उसकी नीति का हिस्सा है।भारत के लिए वेनेजुएला से तेल की संभावित खरीद एक अवसर भी है और चुनौती भी। जहां एक ओर सस्ता तेल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी शर्तों और नियंत्रण के साथ संतुलन बनाना होगा।













