Saturday, August 22, 2026
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‘मोदी का फोन नहीं आया’! ट्रम्प के ईगो में फंसी भारत-अमेरिका ट्रेड डील! अमेरिकी मंत्री का बड़ा खुलासा

वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील के अटकने को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने दावा किया है कि भारत के साथ डील किसी नीतिगत मतभेद या व्यापारिक विवाद के कारण नहीं रुकी, बल्कि इसकी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को सीधे फोन न करना रहा।

‘डील पूरी थी, बस एक कॉल बाकी था’

एक पॉडकास्ट बातचीत में हॉवर्ड लुटनिक ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। अमेरिकी प्रशासन ने भारत को समझौता फाइनल करने के लिए तीन शुक्रवारों की समय-सीमा दी थी। लुटनिक के अनुसार,
“डील पूरी तरह तैयार थी। राष्ट्रपति ट्रम्प इसे व्यक्तिगत तौर पर क्लोज करना चाहते थे। बस प्रधानमंत्री मोदी को उन्हें कॉल करना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।”उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारतीय पक्ष शायद सीधे कॉल करने में असहज था, जिसे ट्रम्प ने अपने व्यक्तिगत सम्मान और ईगो से जोड़ लिया

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‘कूटनीति नहीं, व्यक्तित्व बना वजह’

लुटनिक ने साफ किया कि यह मामला टैरिफ, बाजार पहुंच या व्यापारिक शर्तों से जुड़ा नहीं था। उनके मुताबिक, ट्रम्प की कार्यशैली में व्यक्तिगत संवाद को काफी अहम माना जाता है और जब ऐसा नहीं हुआ, तो डील ठंडे बस्ते में चली गई।

भारत की देरी का फायदा अन्य देशों को

अमेरिकी मंत्री ने बताया कि भारत की ओर से देरी का सीधा फायदा वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देशों को मिला। अमेरिका ने इन देशों के साथ तेजी से ट्रेड एग्रीमेंट फाइनल कर लिए, जबकि भारत पीछे छूट गया।

ब्रिटेन का उदाहरण देकर दी तुलना

लुटनिक ने ब्रिटेन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने समय सीमा समाप्त होने से पहले खुद ट्रम्प को फोन किया। इसके ठीक अगले दिन दोनों देशों के बीच ट्रेड डील की घोषणा कर दी गई। इससे साफ होता है कि ट्रम्प प्रशासन में डिप्लोमेसी से ज्यादा पर्सनल आउटरीच को महत्व दिया जाता है।

क्या भारत-अमेरिका रिश्तों पर पड़ेगा असर?

हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी केवल एक डील पर निर्भर नहीं है, लेकिन यह खुलासा बताता है कि वैश्विक राजनीति में अब नीतियों के साथ-साथ नेताओं की व्यक्तिगत केमिस्ट्री भी बड़ी भूमिका निभा रही है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भविष्य में दोनों देशों के बीच बातचीत फिर से पटरी पर लौटती है या यह मौका हाथ से निकल चुका है।

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