और कितनी जान लेगा जहरीली सिरप : MP और राजस्थान में अब तक 12 मासूमों की मौत…..

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और कितनी जान लेगा जहरीली सिरप

भोपाल/जयपुर/मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और राजस्थान के भरतपुर एवं सीकर में बीते 25 दिनों में एक गंभीर त्रासदी सामने आई है, जहां जहरीले कफ सिरप के कारण 5 साल से कम उम्र के 12 मासूमों की किडनी फेल होने से मौत हो चुकी है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल बना दिया है और दवा सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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कफ सिरप में मिला जानलेवा केमिकल

मृतक बच्चों में से कई की किडनी बायोप्सी जांच कराई गई, जिसमें एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन नांदुलकर ने पुष्टि की है कि कफ सिरप में मिला ‘डायएथिलीन ग्लायकॉल’ दूषित पाया गया है। यही जहरीला सिरप बच्चों को दिया गया था, जिससे उनकी किडनी फेल हो गई।

मौत का सिलसिला और लक्षण

जानकारी के मुताबिक, शुरुआत में बच्चों को सामान्य बुखार और सर्दी की शिकायत हुई थी, जिसके बाद स्थानीय डॉक्टरों ने उन्हें खांसी की दवाई दी। दवा से थोड़ी राहत मिली, लेकिन कुछ ही दिनों में बच्चों के पेशाब में कमी आई और फिर अचानक उनकी किडनी फेल होने लगी। पहला मामला 7 सितंबर को सामने आया, जिसके बाद मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता गया।

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स्वास्थ्य विभाग अलर्ट: दो सिरप पर रोक और एडवाइजरी जारी

इस गंभीर त्रासदी के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है और कई बड़े कदम उठाए गए हैं:

सिरप पर तत्काल रोक: मध्य प्रदेश में कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने चिकित्सकों की सलाह पर Coldrif और Nextro-DS सिरप पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है और मेडिकल स्टोर्स को बच्चों को केवल प्लेन सिरप ही देने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच कमेटी: 28 सितंबर को शिकायत मिलने के बाद पूरे प्रकरण की जांच के लिए विभाग ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है, जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट देगी। बताया गया है कि यह खांसी की दवा अब तक 1 लाख 33 हजार से अधिक मरीजों को वितरित की जा चुकी है।

Dextromethorphan’ के इस्तेमाल से बचने की सलाह

राजस्थान के सीकर में एक बच्चे को प्रतिबंधित दवा लिखने पर चिकित्सक और फार्मासिस्ट पर सस्पेंड करने का निर्णय लिया गया है। हेल्थ डिपार्टमेंट ने एडवाइजरी जारी कर चिकित्सकों को विशेष सलाह दी है:

  1. बच्चों में खांसी के लिए Dextromethorphan साल्ट वाले सिरप का प्रयोग यथासंभव न करें।
  2. 4 वर्ष से कम आयु के बच्चों में यह दवा बिल्कुल न दें।
  3. दवा देते समय परिजन को उसके दुष्प्रभाव और सुरक्षित खुराक की जानकारी दें।

इस बीच, छिंदवाड़ा के परासिया क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि स्थानीय लोग लंबे समय से नल से पीला और गंदा पानी आने की शिकायत कर रहे थे।

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