हिमाचल। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। शिमला के कोटखाई, जुब्बल और जुन्गा में देर रात भूस्खलन से छह मकान ढह गए। मलबे में दबने से पिता-बेटी समेत पांच लोगों की मौत हो गई। कई गाड़ियां भी कीचड़ और पत्थरों में दब गईं। वहीं रोहड़ू के दयार मोली गांव में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए चार परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है।
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हमीरपुर के चबूतरा गांव में भी रविवार रात दो मकान ढह गए। मौसम विभाग ने ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर में रेड अलर्ट जारी किया है। शिमला, कुल्लू और चंबा में ऑरेंज अलर्ट है। एहतियातन 10 जिलों के स्कूल-कॉलेज सोमवार को बंद रखे गए हैं। कुल्लू में शिक्षण संस्थान 2 सितंबर को भी बंद रहेंगे।
20 जून से मानसून की शुरुआत के बाद अब तक हिमाचल में 320 लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें से 166 लोग भूस्खलन, बाढ़, बादल फटने और डूबने की घटनाओं में मारे गए हैं। राज्य में करीब 3 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति का नुकसान हो चुका है। सिरमौर के ददाहू में गिरी नदी उफान पर है और प्रशासन ने लोगों को घर खाली करने के निर्देश दिए हैं।
उत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी बारिश का असर देखने को मिल रहा है। पंजाब के 11 जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं और 1312 गांव प्रभावित हैं। जालंधर-लुधियाना के कई इलाकों में चार फीट तक पानी भर गया है। उत्तराखंड में केदारनाथ हाईवे पर भूस्खलन से दो लोगों की मौत और छह घायल हुए, जिसके बाद चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा 5 सितंबर तक रोक दी गई है। जम्मू-कश्मीर के राजौरी में भी 12 मकान भूस्खलन की चपेट में आ गए।
हरियाणा में हथिनीकुंड बैराज से 1.05 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद कई जिलों में हालात बिगड़ गए। सिरसा में मकानों की दीवारें ढह गईं और 50 एकड़ में खड़ी फसल पानी में डूब गई। प्रदेश के यमुनानगर, सिरसा और पंचकूला समेत छह जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं।











