H-1B visa : नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा की फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी है। अब इस वीज़ा के लिए करीब 100,000 अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 88 लाख रुपये तक वसूले जाएंगे। इस फैसले से अमेरिका में काम करने की चाह रखने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स और छात्रों पर सीधा असर पड़ेगा।
H-1B visa : H-1B वीज़ा एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है, जो लॉटरी सिस्टम के तहत जारी किया जाता है और इसकी वैधता तीन साल तक होती है। पहले जहां इसकी फीस 1 से 6 लाख रुपये के बीच थी, अब वह कई गुना बढ़ा दी गई है।
H-1B visa : यह बदलाव भारतीयों को कैसे प्रभावित करेगा, आइए 10 बिंदुओं में समझते हैं:
1. इस फैसले का असर सीधे तौर पर दो लाख से अधिक भारतीयों पर पड़ेगा।
2. अमेरिका की आईटी कंपनियों में कार्यरत भारतीय कर्मचारियों को मुश्किलें झेलनी पड़ेंगी।
3. अमेरिका में नौकरियों की संख्या घट सकती है, जिससे विदेशी उम्मीदवारों को अवसर कम मिलेंगे।
4. अमेरिकी विश्वविद्यालयों में मास्टर्स या पीएचडी कर रहे भारतीय छात्रों पर वित्तीय और प्रोफेशनल असर पड़ेगा।
5. पढ़ाई के बाद अमेरिका में नौकरी पाने के मौके सीमित हो जाएंगे, क्योंकि कंपनियां पहले अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता देंगी।
6. छात्रों और पेशेवरों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जिससे अमेरिका में करियर बनाना और महंगा और कठिन हो जाएगा।
7. करियर की शुरुआत करने वाले युवा भारतीयों को ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
8. अमेरिका में कार्यरत ज्यादातर भारतीय IT और STEM (Science, Technology, Engineering, Math) क्षेत्रों से आते हैं, जिन्हें इस फैसले से सबसे ज्यादा नुकसान होगा।
9. मिड-लेवल और एंट्री-लेवल के कर्मचारियों के लिए वीज़ा प्राप्त करना और भी कठिन हो जाएगा।
10. अमेरिकी कंपनियां लागत बचाने के लिए नौकरियों को भारत जैसे अन्य देशों में आउटसोर्स कर सकती हैं, लेकिन इससे भारत के टैलेंट को अमेरिका में मिलने वाले अवसर कम हो जाएंगे।
H-1B visa : भारत-अमेरिका संबंधों पर असर
H-1B visa : विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल भारतीयों ही नहीं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डालेगा। भारत सरकार की ओर से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया आ सकती है। साथ ही, यह मुद्दा दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों पर भी असर डाल सकता है।













