Gwalior High Court Bar Association Strike : ग्वालियर (16 फरवरी 2026): शिवपुरी के करेरा में अधिवक्ता संजय सक्सेना की जघन्य हत्या के विरोध में आज ग्वालियर के अधिवक्ताओं ने मोर्चा खोल दिया। ग्वालियर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के आह्वान पर हाई कोर्ट, जिला न्यायालय और अन्य अधीनस्थ न्यायालयों में पूर्णतः कार्य बंद रहा। किसी भी न्यायालय में अधिवक्ता पैरवी के लिए नहीं पहुँचे, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हुई।
जमीनी विवाद और भाड़े के हत्यारे
घटना 14 फरवरी की है, जब अधिवक्ता संजय सक्सेना घर से कोर्ट के लिए निकले थे। रास्ते में जमीनी विवाद की पैरवी करने से नाराज सुनील शर्मा और उसके भतीजे कमलेश शर्मा ने भाड़े के हत्यारों के जरिए उनकी गोली मारकर हत्या करवा दी। हालांकि, शिवपुरी पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा किया है, लेकिन ग्वालियर के अधिवक्ताओं का कहना है कि यह हमला सीधे तौर पर न्याय व्यवस्था पर प्रहार है।
एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट और मुआवजे की मांग
न्यायालय के बाहर अधिवक्ताओं ने शिवपुरी जिला पुलिस प्रशासन का पुतला जलाया और मध्य प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अधिवक्ताओं का कहना है कि वे वर्षों से ‘एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट’ लागू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की अनदेखी के कारण वकीलों पर हमले बढ़ते जा रहे हैं। बार काउंसिल ने सरकार के सामने प्रमुख मांगे रखी हैं:
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पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
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परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा मिले।
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प्रदेश में तत्काल एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू हो।
भोपाल कूच की चेतावनी
ग्वालियर बार काउंसिल के अध्यक्ष पवन पाठक ने स्पष्ट किया कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो प्रदेश भर के अधिवक्ता भोपाल जाकर बड़ा धरना-प्रदर्शन करेंगे। प्रशासन की ओर से एसडीएम अतुल सिंह ने अधिवक्ताओं से मुलाकात कर उनकी मांगों का ज्ञापन स्वीकार किया और इसे वरिष्ठ स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया है।
पवन पाठक, अध्यक्ष, बार काउंसिल, ग्वालियर
“हमारे साथी की हत्या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि उनके पेशे की वजह से की गई है। जब तक एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं होगा, हम सुरक्षित नहीं हैं। हमने सरकार को एक हफ्ते का समय दिया है, इसके बाद आंदोलन भोपाल की सड़कों पर होगा।”
अतुल सिंह, एसडीएम, ग्वालियर
“अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया है। हमने उनकी मांगों को शासन तक पहुँचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि उचित निराकरण हो सके।”













