बिलासपुर / नई दिल्ली। Chhattisgarh Coal Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 540 करोड़ रुपये के कोयला लेवी और अवैध वसूली मामले में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी के कथित सहयोगी राकेश जैन (आरके जैन) को बड़ी कानूनी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने राकेश जैन को नियमित जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी रिहाई ट्रायल कोर्ट की ओर से निर्धारित शर्तों और कानूनी औपचारिकताओं के अधीन होगी। इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 27 जुलाई 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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शुरुआती एफआईआर में नहीं था नाम
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कई अहम बिंदुओं पर गौर किया। अदालत ने पाया कि राकेश जैन का नाम मामले की शुरुआती एफआईआर (FIR) में शामिल नहीं था, बल्कि उन्हें बाद में 10 मार्च 2026 को दाखिल किए गए चौथे पूरक आरोपपत्र (Supplementary Charge Sheet) में आरोपी बनाया गया था। इसके साथ ही पीठ ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि इस प्रकरण में कई अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है, जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। इन सभी परिस्थितियों को आधार बनाते हुए अदालत ने उन्हें नियमित जमानत दे दी।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन करने वाले कारोबारियों से प्रति टन 25 रुपये की दर से कथित तौर पर अवैध लेवी वसूली जाती थी, जिसके जरिए करीब 540 करोड़ रुपये का नेटवर्क संचालित होने का आरोप है। राकेश जैन पर इस अवैध वसूली से प्राप्त रकम को खपाने और वित्तीय लेन-देन में सहयोग करने का आरोप है। उन्हें इस मामले में 11 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस जमानत आदेश का मामले के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और ट्रायल कोर्ट में सुनवाई नियमानुसार जारी रहेगी।
