Sunday, September 27, 2026
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C.G News : चार कंधों पर चलता हुआ प्रशासन! 17 किमी खाट पर ढोकर ले जाना पड़ा मरीज, नहीं मिली एंबुलेंस

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र से स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां कमार जनजाति के 60 वर्षीय मनू राम को तबीयत बिगड़ने के बाद परिजनों को खाट में लादकर करीब 17 किलोमीटर तक पहाड़ी रास्तों से नीचे लाना पड़ा। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पंचायत मुख्यालय तक पहुंचने के बाद भी उन्हें एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल सकी।

खाट में लादकर पहाड़ से उतारा मरीज

घटना बुधवार सुबह की है, जब मनू राम अचानक बेसुध होकर गिर पड़े। परिजनों ने करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद उन्हें खाट में लादकर कुल्हाड़ीघाट मुख्यालय तक पहुंचाया। इस दौरान रास्ते बेहद कठिन और पहाड़ी थे, जिससे स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो गई।

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एंबुलेंस नहीं मिली, निजी वाहन बना सहारा

मुख्यालय पहुंचने के बाद परिजनों ने एंबुलेंस की मांग की, लेकिन उन्हें कोई सहायता नहीं मिल सकी। मजबूरन उन्हें निजी वाहन का सहारा लेना पड़ा और मैनपुर के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

वायरल वीडियो ने खोली पोल

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मरीज को खाट में ले जाते हुए देखा जा सकता है। वीडियो ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है और प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अधिकारियों के बयान में विरोधाभास

मामले पर मैनपुर बीएमओ गजेन्द्र ध्रुव ने पहले अनभिज्ञता जताई, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि मरीज को हाई बीपी और पैरालिसिस अटैक आया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि परिजनों ने एंबुलेंस के लिए कॉल नहीं किया होगा, इसलिए सेवा उपलब्ध नहीं हो सकी।

जिला अस्पताल में चल रहा इलाज

जिला अस्पताल के डॉक्टर हरीश चौहान के अनुसार, मनू राम को दोपहर करीब 1:30 बजे भर्ती किया गया। उन्हें स्ट्रोक आया है और शरीर के दाहिने हिस्से में लकवा हो गया है। फिलहाल उनका इलाज जारी है।

स्थानीय लोगों में आक्रोश, सुधार की मांग

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाएं बेहद कमजोर हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल सुधार की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी मरीज को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

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